राहुल गांधी बोलते थे तो मजाक उड़ाते थे..., SIR विवाद पर कांग्रेस का BJP पर सीधा वार, आलोक दूबे ने पूछा, अब चुनाव आयोग पर भरोसा नहीं?
झारखंड में चल रहे वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सियासत गरमा गई है।
Ranchi: झारखंड में चल रहे वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सियासत गरमा गई है। बीजेपी नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने जब राज्य सरकार पर इस पूरी प्रक्रिया में दखल देने का आरोप लगाया, तो कांग्रेस ने उन पर जोरदार पलटवार किया है। झारखंड प्रदेश कांग्रेस के महासचिव आलोक कुमार दूबे ने दो टूक कहा कि SIR पूरी तरह भारत निर्वाचन आयोग की संवैधानिक प्रक्रिया है, न कि राज्य सरकार की। सरकार वोटर लिस्ट नहीं बनाती, इसलिए बीजेपी नेताओं को अनर्गल बयानबाजी करने से पहले चुनाव आयोग के कायदे-कानून समझ लेने चाहिए।
आधार नागरिकता नहीं, सिर्फ पहचान पत्र है
आलोक दूबे ने बीजेपी के बयानों पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव आयोग के सिस्टम में सब कुछ पारदर्शी है। कोई भी वोटर घर बैठे ऑनलाइन अपना नाम चेक कर सकता है, आवेदन का स्टेटस देख सकता है और किसी गड़बड़ी पर दावा या आपत्ति (Claim & Objection) दर्ज करा सकता है। उन्होंने यह भी साफ किया कि आधार कार्ड पहचान के लिए लिया जाता है, यह नागरिकता का पक्का सबूत नहीं है। ऐसे में बाबूलाल मरांडी को यह साफ करना चाहिए कि वे चुनाव आयोग की साख पर सवाल खड़े कर रहे हैं या फिर जानबूझकर राज्य की जनता में भ्रम फैला रहे हैं।
43.61 लाख नाम क्यों छूटे? अभी फाइनल लिस्ट नहीं आई
कांग्रेस नेता ने वोटर लिस्ट के आंकड़े रखते हुए बताया कि झारखंड में SIR के ड्राफ्ट के बाद अलग-अलग तकनीकी वजहों से करीब 43.61 लाख नाम प्रारूप सूची में शामिल नहीं हो सके हैं, जबकि 2.21 करोड़ से ज्यादा नाम ड्राफ्ट रोल में मौजूद हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि यह कोई फाइनल लिस्ट नहीं है। जिन भी योग्य नागरिकों के नाम छूटे हैं, वे तय समय के भीतर दावा-आपत्ति दर्ज कराकर अपना नाम दोबारा जुड़वा सकते हैं।
'राहुल गांधी ने आवाज उठाई तो मजाक उड़ाया, अब खुद क्यों रो रहे?'
आलोक दूबे ने बीजेपी के पुराने रुख पर तंज कसते हुए कहा कि जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी देश भर में वोटर लिस्ट में गड़बड़ी और 'वोट चोरी' का मुद्दा उठाते थे, तब बीजेपी इसे सियासी नौटंकी बताती थी। अब जब वही प्रक्रिया झारखंड में चल रही है, तो बीजेपी खुद सवाल दाग रही है। फर्क सिर्फ इतना है कि बीजेपी सीधे चुनाव आयोग से टकराने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही, इसलिए सारा ठीकरा राज्य सरकार के सिर फोड़ने में लगी है। उन्होंने चुनौती देते हुए पूछा कि जब प्रक्रिया चुनाव आयोग की है, तो सरकार को किस आधार पर घेरा जा रहा है?
न योग्य का नाम कटेगा, न फर्जी जुड़ेगा
कांग्रेस ने अपना रुख साफ करते हुए कहा कि पार्टी का सीधा मानना है कि किसी भी असली और योग्य नागरिक का नाम लिस्ट से बाहर नहीं होना चाहिए, और न ही किसी अपात्र व्यक्ति का नाम फर्जी तरीके से अंदर रहना चाहिए। उन्होंने अपील की कि SIR को लेकर डर और अफवाह की राजनीति करने के बजाय पूरी प्रक्रिया को कानून और पारदर्शिता के साथ पूरा होने देना चाहिए।
specializes in local and regional stories, bringing simple, factual, and timely updates to readers.






