Jharkhand (Giridih): विश्व हिंदू परिषद के संस्थापक प्रवीण तोगड़िया एक सम्मेलन में भाग लेने गिरिडीह पहुंचे थे. जहां से उन्होंने कई ऐसे बयान दिए जिससे धार्मिक सहिष्णुता पर समाज में प्रभाव पड़ सकता है. उन्होंने मिडिल ईस्ट के देशों में ईरान द्वारा किए जाने वाले हमलों और यूएस-इजरायल के साथ जारी ईरान के युद्ध को “हिंदू समाज के लिए संतोषजनक” बताने जैसी टिप्पणियां कीं.
मिडिल ईस्ट के तनाव को हिंदू हित से जोड़ने का प्रयास
तोगड़िया ने ईरान, सऊदी अरब, कुवैत और दुबई के बीच चल रहे तनावों और पाकिस्तान-अफगानिस्तान घटनाओं का हवाला देते हुए इसे हिंदू हित में जोड़ने का प्रयास किया.
उन्होंने मोदी सरकार की नीतियों की तारीफ करते हुए राम मंदिर निर्माण और कश्मीर से धारा 370 हटाने जैसे कदमों को हिंदू संगठन के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बताया.
"हिंदू जाग गया तो..."
स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी के रामनवमी विवाद को लेकर तोगड़िया ने कहा कि जिस दिन झारखंड के हिन्दू जाग गए, उस दिन इरफान बाबू को कड़ा जवाब मिलते देर नहीं लगेगा. इस तरह की भाषा सरकारी और नागरिक स्तर पर तनाव बढ़ाने वाली और विवादास्पद हो सकती है.
"त्रिशूल दीक्षा" का आयोजन, युवाओं को दिलाई शपथ
सम्मेलन में उन्होंने “त्रिशूल दीक्षा” का आयोजन किया और उपस्थित युवाओं को शपथ दिलाई कि वे समाज और देश के हित में सक्रिय भूमिका निभाएंगे. जबकि ये कार्यक्रम संगठनात्मक दृष्टि से सामान्य प्रतीत हो सकते हैं, भड़काऊ भाषण और धार्मिक प्रतीकों का राजनीतिक उद्देश्यों के लिए प्रयोग चिंताजनक है. स्थानीय नेताओं और समाज के सदस्यों द्वारा स्वागत किया गया.
इस प्रकार के आयोजनों और बयानों का लंबी अवधि में सामाजिक सहिष्णुता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. साथ ही साम्प्रदायिक भावना को उभारने वाले माने जा सकते हैं और समुदायों के बीच सह-अस्तित्व भी प्रभावित हो सकते हैं.
रिपोर्ट: मनोज कुमार पिंटू






