औचक निरीक्षण में खुली सरकारी कार्यालयों की पोल, अधिकारी-कर्मी मिले गायब; डेढ़ दर्जन पर कार्रवाई
पूर्वी चंपारण के कोटवा प्रखंड में सरकारी कार्यालयों की कार्यप्रणाली की उस समय पोल खुल गई, जब सदर एसडीएम अरुण कुमार ने बीडीओ के साथ विभिन्न सरकारी कार्यालयों का औचक निरीक्षण किया।


Kotwa News: पूर्वी चंपारण के कोटवा प्रखंड में सरकारी कार्यालयों की कार्यप्रणाली की उस समय पोल खुल गई, जब सदर एसडीएम अरुण कुमार ने बीडीओ के साथ विभिन्न सरकारी कार्यालयों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान अंचल कार्यालय, बाल विकास परियोजना कार्यालय, पीएचसी और राशन गोदाम में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।
निरीक्षण के दौरान कई जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी बिना अवकाश स्वीकृति और वरीय अधिकारियों को सूचना दिए कार्यालय से अनुपस्थित मिले। एसडीएम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए करीब डेढ़ दर्जन पदाधिकारियों और कर्मियों पर कार्रवाई का निर्देश दिया है।
अंचल कार्यालय में सीओ समेत कर्मचारी मिले अनुपस्थित
औचक निरीक्षण के दौरान कोटवा अंचल कार्यालय में सीओ अनुपस्थित मिलीं। कार्यालय में अपनी समस्याओं को लेकर बड़ी संख्या में आमलोग मौजूद थे, लेकिन सीओ के कार्यालय से गायब रहने के साथ कर्मचारियों की बायोमेट्रिक उपस्थिति भी दर्ज नहीं मिली।
इस स्थिति ने सरकारी कार्यालयों में अधिकारियों और कर्मचारियों की मौजूदगी तथा कामकाज की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
सीडीपीओ कार्यालय में ताला, कई जरूरी पंजी भी नहीं मिले
इसके बाद एसडीएम ने बाल विकास परियोजना कार्यालय का निरीक्षण किया। यहां सीडीपीओ के कक्ष पर ताला लटका मिला, जबकि कार्यालय के बड़ा बाबू भी मौजूद नहीं थे।जांच के दौरान कई आवश्यक पंजी भी कार्यालय में उपलब्ध नहीं पाए गए। इससे कार्यालय के कामकाज और रिकॉर्ड संधारण की व्यवस्था पर सवाल उठे।
पीएचसी में डॉक्टर गायब, एएनएम के भरोसे मिली व्यवस्था
कोटवा पीएचसी की स्थिति भी निरीक्षण के दौरान चिंताजनक मिली। अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी के साथ ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर भी अनुपस्थित पाए गए।
अस्पताल में मरीजों की देखभाल एएनएम के भरोसे चलती मिली। मरीजों ने अधिकारियों को अपनी परेशानियां बताते हुए कहा कि बिजली कटने के बाद प्रसव कक्ष में टॉर्च के सहारे इलाज करना पड़ता है। अस्पताल में पर्याप्त पावर बैकअप की व्यवस्था नहीं होने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। निरीक्षण के दौरान मरीजों के बेड पर गार्ड के आराम करने की बात भी सामने आई, जिस पर अधिकारियों ने गंभीरता दिखाई।
राशन गोदाम का निरीक्षण करने पर वहां भी स्थिति संतोषजनक नहीं मिली। गोदाम के एजीएम अनुपस्थित थे और गोदाम मजदूरों के भरोसे खुला मिला। इसके अलावा भंडारण और साफ-सफाई की व्यवस्था भी ठीक नहीं पाई गई। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने कई अन्य अनियमितताएं भी दर्ज कीं।
करीब डेढ़ दर्जन अधिकारियों-कर्मियों पर कार्रवाई
औचक निरीक्षण में सामने आई खामियों को सदर एसडीएम अरुण कुमार ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने सीओ, सीडीपीओ, अस्पताल प्रभारी, ड्यूटी से अनुपस्थित डॉक्टर, एजीएम और सीडीपीओ कार्यालय के बड़ा बाबू समेत करीब डेढ़ दर्जन पदाधिकारियों एवं कर्मियों का एक दिन का वेतन काटने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही सभी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है।
एसडीएम ने स्पष्ट किया है कि संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों का स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया गया तो उनके खिलाफ और कड़ी कार्रवाई की जाएगी। औचक निरीक्षण की कार्रवाई के बाद कोटवा प्रखंड के सरकारी कार्यालयों में हड़कंप मचा हुआ है। अधिकारियों की इस कार्रवाई से अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारियों में भी खलबली मची है।
आम लोगों की सुनवाई कौन करेगा?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब सरकारी कार्यालयों में अधिकारी और जिम्मेदार कर्मचारी ही मौजूद नहीं रहेंगे, तो अपनी समस्याओं को लेकर वहां पहुंचने वाले आम लोगों की सुनवाई आखिर कौन करेगा?
औचक निरीक्षण में सामने आई अनियमितताएं सरकारी कार्यालयों में जवाबदेही और कर्मचारियों की उपस्थिति व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। अब देखना होगा कि 24 घंटे के भीतर मांगे गए स्पष्टीकरण के बाद संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई की जाती है।
(प्रतिक सिंह की रिपोर्ट)

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