शादी का झांसा देकर दुष्कर्म के मामले में सूरज गोप बरी, कोर्ट में मुकरी पीड़िता, कहा- 'जबरन नहीं बनाए थे संबंध'
रांची सिविल कोर्ट के अपर न्यायायुक्त (एडिशनल ज्यूडिशियल कमिश्नर) अरविंद कुमार नंबर-2 की अदालत ने शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।

Ranchi Civil Court: रांची सिविल कोर्ट के अपर न्यायायुक्त (एडिशनल ज्यूडिशियल कमिश्नर) अरविंद कुमार नंबर-2 की अदालत ने शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने ठोस और पुख्ता साक्ष्यों के अभाव में आरोपी सूरज गोप को सभी आरोपों से बाइज्जत बरी कर दिया है। यह मामला रांची के नगड़ी थाना क्षेत्र से संबंधित था, जहां सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुनाया।
बचाव पक्ष की दलील और जिरह में खुली सच्चाई
अदालत में मुकदमे की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता प्रितांशु कुमार सिंह ने मजबूती से पक्ष रखा। उन्होंने अदालत के समक्ष दलील दी कि यह मामला आपराधिक कृत्य का नहीं, बल्कि आपसी संबंधों और सहमति का था। जिरह (क्रॉस-एग्जामिनेशन) के दौरान खुद पीड़िता ने अदालत में स्वीकार किया कि आरोपी सूरज गोप ने कभी भी उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध नहीं बनाए थे।
'शादी नहीं होने के कारण दर्ज कराया था मुकदमा'
पीड़िता ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि वह आरोपी से विवाह करना चाहती थी। जब किसी कारणवश दोनों की शादी नहीं हो सकी, तो आवेश और नाराजगी में उसने थाने में प्राथमिकी दर्ज करा दी थी। इसके साथ ही पीड़िता ने अदालत को बताया कि वह अब इस मुकदमे को आगे नहीं लड़ना चाहती है।
गवाह मुकरे, अभियोजन साबित नहीं कर सका आरोप
मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में कुल तीन गवाह पेश किए गए थे। इनमें से मामले के अनुसंधानकर्ता (IO) केवल औपचारिक गवाह रहे, जबकि महत्वपूर्ण ग्रामीण गवाह पिंटू महतो अदालत में अपने पूर्व के बयान से मुकर गए। पीड़िता के बयानों और गवाहों के समर्थन न करने के कारण अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ लगे आरोपों को साबित करने में पूरी तरह विफल रहा, जिसके बाद अदालत ने सूरज गोप को दोषमुक्त करार देते हुए बरी कर दिया।

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