JPSC मामले में CID ने UP में TDPL का दफ्तर किया सील, 10-10 लाख में बिका था PT!
14वीं JPSC परीक्षा धांधली मामले में CID ने लखनऊ स्थित TDPL कार्यालय सील कर दस्तावेज जब्त किए। पूछताछ में तीन अभ्यर्थियों ने PT पास कराने के लिए 10-10 लाख रुपये देने की बात कही।

JPSC-JSSC Scam: झारखंड की 14वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा में हुई धांधली और धांधली के आरोपों के मामले में CID ने अब तक की सबसे बड़ी और कड़ी कार्रवाई की है। परीक्षा आयोजित कराने वाली विवादित एजेंसी TDPL के उत्तर प्रदेश स्थित मुख्य कार्यालय पर CID की टीम ने धावा बोलकर उसे पूरी तरह से सील कर दिया है। 18 अगस्त को हुई इस अचानक छापेमारी से हड़कंप मच गया है, जहां जांच टीम ने कंपनी के लखनऊ स्थित दफ्तर से कई बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए हैं।
Lucknow के दो कमरों से चलता था 19 करोड़ का खेल
CID की जांच में TDPL कंपनी को लेकर बेहद हैरान करने वाले खुलासे हुए हैं। जिस कंपनी को लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य का फैसला करने वाली JPSC परीक्षा कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, उसका दफ्तर लखनऊ के इंजीनियरिंग कॉलेज चौराहे पर स्थित आदर्श कॉम्प्लेक्स की दूसरी मंजिल पर महज दो कमरों में चल रहा था। स्थानीय मड़ियांव थाना पुलिस के सहयोग से की गई इस छापेमारी में दफ्तर को पूरी तरह से सील कर दिया गया है। कागजों में 965 कर्मचारियों का दावा करने वाली इस कंपनी का राजस्व वित्त वर्ष 2024-25 में उछलकर 19.62 करोड़ रुपये पहुंच गया था, जबकि इससे एक साल पहले यह सिर्फ 5.23 करोड़ रुपये ही था।
एक डायरेक्टर जेल की सलाखों में, दूसरे की तलाश में ताबड़तोड़ रेड
इस फर्जीवाड़े में शामिल कंपनी के मालिकों पर CID का शिकंजा पूरी तरह से कस चुका है। कंपनी के 50 फीसदी शेयरहोल्डर और निदेशक रामवीर सिंह को CID ने 23 जुलाई को ही गिरफ्तार कर लिया था। वहीं, दूसरे 50 फीसदी के हिस्सेदार और सह-निदेशक सत्यपाल सिंह अभी भी फरार चल रहे हैं। सत्यपाल सिंह की गिरफ्तारी के लिए CID की विशेष टीमें लखनऊ, कानपुर समेत UP के कई बड़े शहरों में लगातार दबिश दे रही हैं और जगह-जगह छापेमारी की जा रही है।
'10-10 लाख रुपये में पास कराया गया JPSC PT!'
मामले की जांच कर रही CID के सामने सबसे बड़ा और चौंकाने वाला सच तब आया, जब परीक्षा में पास हुए अभ्यर्थियों से पूछताछ की गई। CID ने गुरुवार को 14वीं JPSC PT परीक्षा पास करने वाले तीन सफल अभ्यर्थियों के साथ-साथ गिरोह के एजेंटों उमाकांत उरांव, मनोज कुमार और रोशन केरकेट्टा से कड़ाई से पूछताछ की। इस दौरान अभ्यर्थियों ने साफ स्वीकार किया कि JPSC PT परीक्षा पास कराने के एवज में उन्होंने 10-10 लाख रुपये का भारी-भरकम एडवांस पेमेंट किया था। यह पूरी वसूली अभय तिवारी के मुख्य एजेंट रमेश कुमार के नेटवर्क से हुई थी, जिसमें उमाकांत खुद भी एक एजेंट की भूमिका निभा रहा था। CID अब इस पूरे रैकेट की कड़ियां जोड़कर बाकी सरगनाओं को दबोचने में जुटी है।
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