रिपोर्ट:- सत्यव्रत किरण
सरकारी अस्पतालों में इलाज के साथ मरीजों को पौष्टिक और स्वच्छ भोजन उपलब्ध कराना भी उतना ही जरूरी माना जाता है। डॉक्टरों का भी कहना है कि दवा के साथ सही खान-पान मरीज के जल्द स्वस्थ होने में अहम भूमिका निभाता है। रांची के बड़े सरकारी अस्पतालों की रसोई व्यवस्था को देखकर यह सवाल उठने लगा है कि क्या मरीजों को वाकई साफ और सुरक्षित भोजन मिल पा रहा है। रांची के रिम्स (राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान) में भर्ती मरीजों को सरकार की ओर से निःशुल्क भोजन देने की व्यवस्था है। कागजों पर यह व्यवस्था मरीजों के लिए बड़ी राहत मानी जाती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और तस्वीर दिखाती है।
रिम्स के किचन में भोजन तैयार करने और पैक करने की प्रक्रिया में स्वच्छता के बुनियादी नियमों की अनदेखी सामने आई। कई जगहों पर कर्मचारी बिना ग्लव्स और बिना कैप के ही भोजन बनते और पैक करते नजर आए। कुछ जगहों पर खाना खुले में रखा हुआ था, जिससे उस पर धूल-मिट्टी गिरने की आशंका बनी रहती है।
किचन में साफ-सफाई के दौरान उड़ने वाली धूल भी उसी माहौल में फैलती दिखाई दी, जहां मरीजों के लिए खाना तैयार किया जा रहा था। ऐसे हालात में यह चिंता स्वाभाविक है कि क्या यह भोजन मरीजों के लिए पूरी तरह सुरक्षित है।
किचन में खुले में रखे अंडे भी देखे गए। अस्पताल में भर्ती मरीजों को सप्ताह में दो दिन अंडा देने का प्रावधान है, लेकिन जिस तरह से इन्हें बिना ढके रखा गया था, उससे हाइजीन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। खुले माहौल में मक्खियों के बैठने या अन्य गंदगी पड़ने का खतरा भी बना रहता है।
रिम्स अस्पताल के किचन से जो तस्वीर सामने आई, जहां साफ-सफाई और हाइजीन के मानकों को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस मरीज को ठीक करने के लिए अस्पताल में भर्ती किया जाता है, अगर उसे अस्वच्छ या संदिग्ध माहौल में तैयार भोजन दिया जाएगा तो उसका स्वास्थ्य कैसे बेहतर होगा। दवा के साथ मिलने वाला भोजन अगर लापरवाही का शिकार हो जाए, तो यह मरीजों की सेहत के साथ गंभीर जोखिम बन सकता है।
अब देखना यह होगा कि इन तस्वीरों के सामने आने के बाद जिम्मेदार अधिकारी इस व्यवस्था को सुधारने के लिए कदम उठाते हैं या फिर मरीजों की थाली तक पहुंचने वाली यह लापरवाही यूं ही जारी रहती है।






