RIMS को 3 माह में कैशलेस-पेपरलेस सिस्टम का लक्ष्य , उच्च स्तरीय कमिटी का हुआ गठन
राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान में 1 करोड़ रुपये से अधिक की उन निविदाओं पर अब उच्च स्तरीय जांच होगी, जिन्हें राज्य वित्त समिति (एसएफसी) की अनिवार्य स्वीकृति के बिना जारी किया गया। यह निर्णय मंगलवार को आयोजित स्थायी वित्त एवं लेखा समिति की 14वीं बैठक में लिया गया

Jharkhand (Ranchi): राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान में 1 करोड़ रुपये से अधिक की उन निविदाओं पर अब उच्च स्तरीय जांच होगी, जिन्हें राज्य वित्त समिति (एसएफसी) की अनिवार्य स्वीकृति के बिना जारी किया गया। यह निर्णय मंगलवार को आयोजित स्थायी वित्त एवं लेखा समिति की 14वीं बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने की। बैठक में वित्तीय पारदर्शिता, अधोसंरचना विकास और प्रशासनिक सुधार सहित कुल 15 एजेंडों पर चर्चा हुई। समिति ने स्पष्ट किया कि 1 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली योजनाओं के लिए एसएफसी की स्वीकृति अनिवार्य है, इसके बावजूद जारी निविदाएं नियमों का उल्लंघन हैं। पूरे मामले की जांच के लिए एक विशेष कमेटी गठित की जाएगी, जो अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। चिकित्सा उपकरणों की खरीद में पारदर्शिता की कमी पर भी कड़ी नाराजगी जताई गई। जब लागत विवरण मांगा गया तो प्रबंधन उसे उपलब्ध नहीं करा सका, जिस पर अध्यक्ष ने सवाल उठाते हुए कहा कि बिना लागत विवरण के खरीद प्रक्रिया शुरू करना नियमों के खिलाफ है। उन्होंने निर्देश दिया कि भविष्य में सभी टेंडर समिति की स्वीकृति के बाद ही जारी किए जाएं। संस्थान के विकास के लिए कई अहम फैसले भी लिए गए। सभी नए हॉस्टलों को 12 मंजिला बनाने, अंडरग्रेजुएट हॉस्टल के नवीनीकरण और पीजी हॉस्टल को पीपीपी मोड पर विकसित करने पर सहमति बनी। साथ ही, अगले तीन महीनों में संस्थान को पूरी तरह कैशलेस और पेपरलेस बनाने का लक्ष्य तय किया गया। आधुनिक चिकित्सा सेवाओं के तहत रोबोटिक सर्जरी शुरू करने और जेनेटिक बीमारियों के इलाज को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया। सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए रिटायर्ड वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति का भी निर्णय लिया गया।
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