झारखंड में कोयला-आयरन ओर के दाम आसमान पर!, चंपाई सोरेन ने बंगाल-ओडिशा से की तुलना, उत्पादन घटने का किया दावा
चंपाई सोरेन ने झारखंड में कोयला और लौह अयस्क की बढ़ती कीमतों को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने उत्पादन, खनन राजस्व और सेस के असर की तुलना ओडिशा-बंगाल से की।

Ranchi: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता चंपाई सोरेन ने खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर राज्य सरकार पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि खनिज क्षेत्र के वास्तविक और जमीनी आंकड़े सामने रखने के बजाय राज्य सरकार जनता को भ्रमित करने में जुटी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर बयान जारी करते हुए उन्होंने साफ किया कि इस संशोधन के बाद भी रॉयल्टी, नीलामी प्रीमियम, डीएमएफटी (DMFT) और राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण ट्रस्ट से राज्य को मिलने वाले राजस्व पर कोई खास नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।
सेस से भारी नुकसान के दावों पर उठाए सवाल
चंपाई सोरेन ने राज्य सरकार द्वारा 16 हजार से 22 हजार करोड़ रुपये के संभावित नुकसान के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में सेस से राज्य को लगभग 7,486 करोड़ रुपये की आय हुई थी। जब राज्य में कोयला और लौह अयस्क का उत्पादन लगातार नीचे गिर रहा है, तो ऐसे में सेस से मिलने वाली आय के तीन से चार गुना बढ़ने का दावा किस आधार पर किया जा रहा है?
पड़ोसी राज्यों के मुकाबले झारखंड में महंगा हुआ कोयला
पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि झारखंड में कोयले पर 450 रुपये प्रति टन और लौह अयस्क पर 600 रुपये प्रति टन सेस थोपे जाने से खनिजों की कीमतें बेतहाशा बढ़ी हैं। उन्होंने तुलना करते हुए बताया कि झारखंड में थर्मल कोयले की कीमत करीब 2,459 रुपये प्रति टन तक पहुंच गई है, जबकि पड़ोसी राज्य ओडिशा में इसी ग्रेड का कोयला लगभग 1,708 रुपये और पश्चिम बंगाल में 1,741 रुपये प्रति टन में उपलब्ध है। कीमतों में इस भारी अंतर के चलते स्थानीय उद्योगों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ रहा है और इससे अवैध कारोबार को बढ़ावा मिल रहा है।
उत्पादन में 15% की गिरावट, कोल कंपनियों को नुकसान
सेस लगाए जाने के दुष्परिणामों का जिक्र करते हुए चंपाई सोरेन ने कहा कि राज्य में कोयला और लौह अयस्क के उत्पादन में करीब 12 से 15 प्रतिशत की गिरावट आई है। इसके चलते बीसीसीएल (BCCL) के उत्पादन में लगभग 50 लाख टन की भारी कमी हुई है, सीसीएल (CCL) के मुनाफे में 27 प्रतिशत की गिरावट आई है और ईसीएल (ECL) को करीब 966 करोड़ रुपये का बड़ा वित्तीय नुकसान झेलना पड़ा है।
ओडिशा से तुलना, 50 हजार करोड़ बनाम 11.9 हजार करोड़
चंपाई सोरेन ने बताया कि साल 2014 के बाद से देशभर के राज्यों की खनन आय में करीब 354 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है और खनन राजस्व का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा सीधे राज्यों की झोली में जाता है। ओडिशा का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां 35 नीलाम खनिज ब्लॉक शुरू होने से करीब 87 हजार करोड़ रुपये का नीलामी प्रीमियम मिला, जिससे ओडिशा का वार्षिक खनन राजस्व 13,700 करोड़ से बढ़कर 45 से 50 हजार करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। इसके विपरीत झारखंड का खनन राजस्व 2020-21 के 7,500 करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में केवल 11,900 करोड़ रुपये तक ही पहुंच सका। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि स्वीकृत खदानों को तत्काल शुरू कराया जाए, युवाओं का रोजगार बचाया जाए और अवैध खनन पर प्रभावी अंकुश लगाया जाए।
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