खुले आसमान के नीचे कड़ाके की ठंड में 40 घंटे से भूख हड़ताल पर नवोदय के छात्र, खोली व्यवस्था की पोल
कड़ाके की ठंड के बीच यहां कक्षा 6 से 12वीं तक के छात्र-छात्राएं पिछले 40 घंटे से अधिक समय से भूख हड़ताल पर हैं और खुले आसमान के नीचे रात-दिन धरने पर बैठे हुए हैं.

Bihar (Motihari / East Champaran): बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय, पिपराकोठी इन दिनों पढ़ाई नहीं, बल्कि छात्रों के आक्रोश, अनशन और धरना प्रदर्शन को लेकर चर्चा में है. कड़ाके की ठंड के बीच यहां कक्षा 6 से 12वीं तक के छात्र-छात्राएं पिछले 40 घंटे से अधिक समय से भूख हड़ताल पर हैं और खुले आसमान के नीचे रात-दिन धरने पर बैठे हुए हैं. स्थिति यह है कि छात्रों ने विद्यालय का हॉस्टल पूरी तरह छोड़ दिया है.
शुक्रवार की रात्रि से शुरू हुआ यह विरोध अब एक बड़े आंदोलन का रूप ले चुका है. ठंड, भूख और असहज हालात के बावजूद छात्र अपनी मांगो पर अडिग हैं और लगातार नारे-बाजी कर रहे हैं. “हमारी मांगे पूरी करो”, “मनमानी नहीं चलेगी”, “तानाशाही नहीं चलेगी”. छात्रों का कहना है कि यह आंदोलन अचानक नहीं हुआ. लंबे समय से वे विद्यालय प्रशासन, विशेषकर प्रिंसिपल के कथित मनमाने रवैये, से परेशान थे. कई बार आंतरिक स्तर पर शिकायतें की गईं, लेकिन न तो उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना गया और न ही कोई ठोस समाधान निकाला गया. छात्रों के अनुसार, जब बातचीत के सारे रास्ते बंद हो गए, तब उन्होंने अनशन और धरना प्रदर्शन को आखिरी विकल्प के रूप में चुना.
डर और दबाव का आरोप
धरने पर बैठे छात्रों ने एक और गंभीर आरोप लगाया है. उनका कहना है कि शनिवार देर रात विद्यालय प्रबंधन की ओर से छात्रों को धमकाने और डराने की कोशिश की गई, ताकि वे आंदोलन खत्म कर दें. छात्रों का आरोप है कि इस तरह के दबाव से समस्या सुलझने के बजाय माहौल और ज्यादा तनाव पूर्ण हो गया.
क्या हैं छात्रों की मुख्य मांगें ?
गौरतलब है कि जवाहर नवोदय विद्यालय पूरी तरह आवासीय संस्थान है, जहां छात्रों की पढ़ाई, भोजन, रहने और सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होती है. इसके बावजूद छात्र कई गंभीर मुद्दों को सामने ला रहे हैं जिसमें विद्यालय समिति के नियमों की आड़ में छात्रों की शिकायतों की अनदेखी, अभिभावकों के साथ ठीक व्यवहार नहीं किया जाना, अभिभावकों द्वारा घर से लाए गए भोजन पर प्रतिबंध, हॉस्टल में घटिया और पोषणहीन भोजन देने का आरोप, समस्याएं उठाने पर छात्रों की बात को गंभीरता से न लेना शामिल हैं. छात्रों का कहना है कि ये सभी समस्याएं सीधे तौर पर उनके स्वास्थ्य, मानसिक स्थिति और पढ़ाई को प्रभावित कर रही हैं.
अभिभावकों में गहरी चिंता
जब यह जानकारी अभिभावकों तक पहुंची कि उनके बच्चे कड़ाके की ठंड में खुले आसमान के नीचे भूखे बैठे हैं, तो चिंता और नाराजगी बढ़ गई. कई अभिभावकों ने प्रशासन से सवाल किया है कि “अगर किसी बच्चे की तबीयत बिगड़ती है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?” अभिभावक चाहते हैं कि जिला प्रशासन और नवोदय विद्यालय समिति तत्काल हस्तक्षेप करें.
प्रबंधन का पक्ष
इस पूरे मामले पर जवाहर नवोदय विद्यालय, पिपराकोठी की प्रभारी प्राचार्य सुष्मिता सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि “छात्र-छात्राओं की कुछ मांगें जायज हैं, जबकि कुछ मांगें नवोदय विद्यालय समिति के नियमों के विरुद्ध हैं. धरना और अनशन पर बैठे बच्चों से बातचीत की जा रही है और जल्द ही सभी बच्चों को भोजन करा दिया जाएगा.” हालांकि छात्रों का कहना है कि उन्हें केवल मौखिक नहीं, बल्कि लिखित आश्वासन और ठोस निर्णय चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बनें.
सोशल मीडिया पर भी उठा मामला
नवोदय विद्यालय के छात्रों का यह आंदोलन अब सोशल मीडिया तक पहुंच चुका है. लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या आवासीय विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को इस तरह भूख हड़ताल पर बैठने के लिए मजबूर होना चाहिए? क्या शिक्षा व्यवस्था में संवाद की इतनी कमी हो गई है?
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
अब तक इस मामले में जिला प्रशासन या शिक्षा विभाग की सक्रिय दखल सामने नहीं आई है. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि कड़ाके की ठंड में 40 घंटे से भूखे बैठे छात्रों की सुरक्षा और स्वास्थ्य की जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या नवोदय विद्यालय समिति इस विवाद को सुलझाने के लिए आगे आएगी? और क्या छात्रों की जायज मांगों पर जल्द कोई ठोस और भरोसेमंद फैसला लिया जाएगा?
फिलहाल हालात
फिलहाल जवाहर नवोदय विद्यालय, पिपराकोठी के छात्र-छात्राएं धरनास्थल पर डटे हुए हैं. ठंड बढ़ती जा रही है, समय गुजर रहा है, लेकिन समाधान अब भी दूर नजर आ रहा है. हालांकि अब देखना यह होगा कि यह आंदोलन संवाद से खत्म होता है या प्रशासनिक हस्तक्षेप का इंतजार करता है.
रिपोर्ट- प्रतिक सिंह









