Bihar (Nalanda): बिहार के सुविख्यात और ऐतिहासिक विरासत के लिए जाना जाने वाला शहर नालंदा, जहां से 31 मार्च को एक शर्मनाक घटना सामने आई. जिसने महिला सुरक्षा को लेकर चिंतित लोगों को गुस्से से भर दिया. मणिपुर में साल 2024 में ऐसी ही एक घटना को अंजाम दिया गया था. एक महिला को निर्वस्त्र कर दरिंदों ने सड़कों पर घुमाया था. हुबहू ऐसी ही घटना दोहराने की कोशिश की गई. महिला के कपड़े फाड़ दिए, पीछे से दबोच लिया और सड़कों पर घुमाने हुए वीडियो बनाने लगे.
अभद्रता की वीडियो बनाई, फिर हो गया फरार
महिला दुकान पर प्रतिदिन की जरूरतों वाले सामान खरीदने गई थी. जहां कुछ सड़क छाप लोग उससे बदसलूकी करने लगे, जब उसने मना किया तो ग्रुप में आए वहसी आदमियों ने उसके कपड़े उतारने की कोशिश की. उससे गलत तरीके से गलत शब्दों का प्रयोग कर अभद्रता करने लगे. महिला के प्राइवेट स्थानों पर छूने लगे. वहीं उन वहसियों द्वारा इस अभद्रता की वीडियो भी बनाई जा रही थी. बाद में घटना को अंजाम देने वाला मुख्य आरोपी फरार हो गया और सोशल मीडिया में वीडियो अपलोड कर दी.
मदद की नहीं सुनी किसी ने पुकार
महिला इस बीच भैया-भैया कह कर मदद के लिए पुकार रही थी. छोड़ देने की गुहार लगा रही थी. लेकिन इंसानी वेष में आए राक्षसों की टोली ने राक्षसीपन जारी रखा और न तो वहां मौजूद लोगों ने आगे आकर उन दरिंदों को रोकने की या महिला को उनसे छुड़ाने की कोशिश की. इस घटना से आदमियों की प्रवृत्ति पर तो सवाल उठते ही हैं. साथ ही एक समाज के सभ्य होने पर भी प्रश्न चिन्ह लग जाता है.
क्या सिर्फ अभद्रता करने वाला है गुनहगार?
सवाल छोटा लेकिन बहुत गहरा है. हमें बचपन में पढ़ाया जाता था कि अपराध करने वाला तो गलत होता ही है, साथ ही जो इसे होते देखता रहे वह भी अपराध को बढ़ावा देने में उतना ही सहायक होता है, जितना उसे करने वाला. नालंदा में उस वक्त इस घटना को देखने वाले सैकड़ों लोग होंगे. लेकिन क्यों किसी ने आगे आकर इसे रोकने की हिम्मत नहीं दिखाई. समाज में व्याप्त ऐसे दरिंदे क्या उन मूक दर्शक बने लोगों के घरों की महिलाओं-स्त्रियों के साथ गलत नहीं कर सकते? बिल्कुल कर सकते हैं. ऐसे दरिंदों को आज के समय राजनीतिक सपोर्ट भी प्राप्त होता है. इसलिए कई ऐसी नृशंस घटनाओं के पीछे नेताओं की संलिप्तता सामने आ ही जाती है. ऐसे काम करने वाले और देखने वाले कहीं से भी एक सभ्य समाज के परिचायक नहीं हो सकते.
बेखौफ गुनहगार.. नाकाम सरकार
महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों पर नकेल तभी कसा जा सकता है, जब इन पर सख्त कार्रवाई की जाए. जिससे ऐसा कुछ करने से पहले उनके मन में सजा मिलने का डर हो और वे लाख बार सोचें. ऐसी घटनाएं सरकार की महिला सुरक्षा को लेकर झूठे दावों की पोल खोलती नजर आती है.









