रांची : झारखंड सरकार द्वारा पुलिस प्रशासन के लिए छह सौ से अधिक नई गाड़ियों की खरीद के फैसले पर भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अजय साह ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस कदम को केवल दिखावटी और प्रतीकात्मक राजनीति बताते हुए कहा कि राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है, लेकिन सरकार का ध्यान अपराध नियंत्रण के बजाय प्रचार और फोटो सेशन पर अधिक केंद्रित दिख रहा है।
अजय साह ने कहा कि जब राज्य में मूलभूत समस्याएँ जस की तस बनी हुई हों, तब इस तरह की घोषणाएँ जनता की आँखों में धूल झोंकने जैसी प्रतीत होती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आए दिन खबरें सामने आती हैं कि पीसीआर वैन अवैध बालू और कोयला ढोने वाले ट्रकों से वसूली में लगी रहती हैं, लेकिन इस पर सरकार ने आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। ऐसे में केवल नई गाड़ियों की खरीद से कानून व्यवस्था कैसे सुधरेगी, यह बड़ा सवाल है।
उन्होंने कहा कि राज्य की स्थिति यह हो गई है कि धनबाद के एक रेस्टोरेंट संचालक को रंगदारी से परेशान होकर राज्य छोड़कर पंजाब जाना पड़ा। वहीं राजधानी रांची में दिनदहाड़े रेस्टोरेंट के अंदर गोलीबारी की घटनाएँ सामने आ रही हैं। कुख्यात गैंगस्टर प्रिंस खान की खुलेआम धमकियाँ यह दिखाती हैं कि अपराधियों के मन में कानून का डर खत्म होता जा रहा है।
अजय साह ने आरोप लगाया कि राज्य में पुलिस अधिकारियों की पोस्टिंग का आधार कानून व्यवस्था मजबूत करना नहीं बल्कि अवैध कारोबार को संरक्षण देना बन गया है। उन्होंने कहा कि जब व्यवस्था का यह हाल हो, तब गाड़ियों की खरीद का ढिंढोरा पीटना जनता को गुमराह करने जैसा है।
उन्होंने यह भी कहा कि जिस सरकार के कार्यकाल में नियुक्त किए गए पूर्व डीजीपी पर ही आपराधिक गिरोह से जुड़े होने के आरोप लगे हों और मौजूदा डीजीपी की नियुक्ति पर भी सवाल उठे हों, उस सरकार को पहले पुलिस व्यवस्था की विश्वसनीयता बहाल करने पर ध्यान देना चाहिए।
अजय साह ने कहा कि भाजपा पुलिस को आधुनिक संसाधन और बेहतर सुविधाएँ देने के पक्ष में है, लेकिन जब राज्य में अपराधी बेखौफ घूम रहे हों और जनता असुरक्षित महसूस कर रही हो, तब केवल गाड़ियों की खरीद से कानून व्यवस्था सुधारने का दावा करना वास्तविक समाधान नहीं है। उन्होंने सरकार से अपील की कि दिखावे की राजनीति छोड़कर अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि राज्य में कानून का डर कायम हो और जनता को सुरक्षा का भरोसा मिल सके।








