लापता आखिरी शव मिला: जबलपुर बरगी डैम क्रूज हादसे में 13 लोगों की मौत, आज कामराज और उसके भतीजे का मिला शव
बरगी डैम हादसे में एनडीआरएफ की टीम ने आखिरी व्यक्ति कामराज का शव बाहर निकाल लिया है. इससे पहले आज सुबह टीम ने कामराज के भतीजे मयूरम (9 वर्ष) का शव बाहर निकाला था.

Jabalpur Bargi Dam cruise accident: मध्यप्रदेश के जबलपुर स्थित बरगी डैम क्रूज हादसा में बड़ा अपडेट सामने आया है, दरअसल, एनडीआरएफ की टीम ने डैम में डूबे आखिरी व्यक्ति कामराज का शव बाहर निकाल लिया है. इससे पहले आज, रविवार (3 मई 2026) की सुबह टीम ने कामराज के भतीजे मयूरम (9 वर्ष) का शव बाहर निकाला था. बता दें, कामराज तमिलनाडु के त्रिची के रहने वाले थे. जबकि शनिवार को NDRF की टीम ने कामराज के 5 साल के बेटे श्रीतमिल और 6 वर्ष के विराज (पिता कृष्ण सोनी) का शव डैम से बाहर निकाला गया था.
हादसे के दौरान क्रूज में सवार थे 47 यात्री
बता दें, 30 अप्रैल 2026 को हुए इस हादसे के बाद पहले दिन 4 शव मिले थे इसके बाद दूसरे दिन 5, तीसरे दिन 2 और चौथे दिन यानी आज, रविवार (3 मई 2026) को 2 और शव डैम से बाहर निकाले गए. इस दर्दनाक क्रूज हादसे में अब मृतकों की कुल संख्या 13 हो गई है. वहीं, इस संबंधि में अधिकारियों का कहना है कि हादसे में लापता हुए सभी लोगों के शव बरामद कर लिए गए है. इसके साथ ही पूरे इलाके में राहत और बचाव टीम द्वारा सतर्कता बरती जा रही है. आपको बता दें, जबलुपर स्थित बरगी डैम में 30 अप्रैल 2026 की शाम करीब साढ़े पांच बजे तेज आंधी तूफान के दौरान क्रूज बरगी डैम में डूब गया था, हादसे के वक्त क्रूज में कुल 47 यात्री सवार थे. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, करीब साढ़े 5 बजे खमरिया टापू के पास तेज आंधी-तूफान और लहरों के दबाव की वजह से क्रूज अचानक अनियंत्रित हो गया. इस दौरान क्रूज में पानी भरने लगा और धीरे-धीरे पानी में समा गया.

मौसम विभाग की चेतावनी के बावजूद डैम में उतारा गया क्रूज !
रिपोर्टस के मुताबिक, क्रूज में जाने के लिए केवल 29 लोगों के लिए टिकट जारी किए गए थे जबकि उसमें 40 से अधिक लोग सवार थे. 30 अप्रैल को मौसम विभाग की तरफ से ऑरेंज अलर्ट करते हुए 50 KM प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं और आंधी-तूफान चलने की चेतावनी जारी की गई थी. इसके बावजूद क्रूज को बरगी डैम में उतारा गया था. हादसे से ठीक पहले की जो वीडियो सोशल मीडिया के जरिए सामने आए हैं उसमें कई यात्री लाइफ जैकैट नहीं पहने हुए थे. और जब क्रूज डूबने को थी तब यात्रियों को लाइफ जैकेट बांटा गया. यह क्रूज कर्मियों की भारी लापरवाही को दिखाती है.
स्थानीय मछुआरों और आसपास के लोगों ने 15 लोगों को बचाया
हालांकि हादसे के शुरुआती वक्त में आसपास के लोग और स्थानीय मछुआरे सहित किसानों ने तेज आंधी-तूफान के बाद भी अपनी जान जोखिम में डाल लोगों की जान बचाने की कवायद शुरू की. इस दौरान उन्होंने 15 से अधिक लोगों को सुरक्षित बचा लिया. वहीं घटना की सूचना मिलने के बाद एनडीआरएफ की टीम और अन्य विशेषज्ञों की टीम मौके पर पहुंची और क्रूज में फंसे कई लोगों को बाहर निकाला गया.

बेटे को सीने से लगाई मां का शव देख सबकी आंखें हुई नम
लेकिन इस त्रासदी में सबसे मार्मिक कर देने वाली तस्वीर उस वक्त आई, जब दिल्ली की रहने वाली एक महिला मरीना मैसा का शव डैम से बाहर निकाला गया. उसके शव को देखकर हर किसी की आंखें नम हो गई. मरीना ने अपने 4 साल के बेटे त्रिशान को अपने लाइफ जैकेट में बांधकर और जीवन के अंतिम क्षण तक सीने से लगाकर रखा था. दोनों के शव को जैसे ही बाहर निकाला गया मौके पर लोगों की चीख-पुकार मच गई. हर कोई स्तब्ध था कि एक मां अपने कलेजे को अंतिम क्षण तक सीने से लगाकर रखी थी. यह दृश्य देखकर पूरा देश दहल उठा.
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