Jharkhand (Ranchi): अप्रैल 2026 में असम चुनाव होने की संभावना है. जिसको लेकर हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली जेएमएम भी चुनावी तैयारियों में जुट गई है. जानकारी के अनुसार हेमंत सोरेन 10 मार्च को असम के लिए रवाना होने वाले हैं. चुनाव के मद्देनजर झारखंड सीएम की यह यात्रा दो दिवसीय होने वाली है.
बताया जा रहा है कि झारखंड सरकार के कई मंत्री पहले से ही असम में मौजूद हैं. जिनमें अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री चमरा लिंडा, राजमहल विधानसभा सीट से जेएमएम विधायक एमटी राजा और जेएमएम नेता विजय हांसदा की मौजूदगी बताई जा रही है.
JMM की असम चुनाव में इंट्री, बढ़ाएगी कांग्रेस की मुश्किलें
सियासी जानकार मानते हैं कि हेमंत सोरेन यदि असम में अपनी पार्टी का विस्तार करते हैं, तो सबसे ज्यादा परेशानी कांग्रेस पार्टी को होगी. हेमंत सोरेन बीजेपी नहीं, बल्कि कांग्रेस के वोट को काटेंगे. हेमंत सोरेन उस समुदाय को टारगेट कर रहे हैं, जो समुदाय कांग्रेस को वोट करता है. वैसे आदिवासी समुदाय जो कांग्रेस को समर्थन करते आएं हैं, अब हेमंत की ओर मुड़ सकते हैं. सूत्रों के अनुसार, हेमंत सोरेन चाय बागानों में मजदूरी के स्थिर रहने, भूमि अधिकारों की कमी, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा तक खराब पहुंच और पूर्ण अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा प्राप्त करने की अनसुलझी मांग जैसी लंबे समय से चली आ रही शिकायतों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं. पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि जेएमएम लगभग 35 से 40 विधानसभा क्षेत्रों का आकलन कर रही है, जहां आदिवासी और चाय बागान मजदूर एक निर्णायक वोट ब्लॉक बनाते हैं. 126 सदस्यीय विधानसभा में यह एक महत्वपूर्ण संख्या है.
नेताओं की राय क्या है?
एएएसएए के पूर्व अध्यक्ष स्टीफन लकरा का मानना है कि गठबंधन महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. उन्होंने मीडिया को बताया कि अगर जेएमएम कांग्रेस के साथ गठबंधन करती है, तो इसका असर पड़ सकता है. अगर वह अकेले चुनाव लड़ती है, तो इसका प्रभाव सीमित हो सकता है. वहीं दूसरी ओर, भाजपा ने असम में जेएमएम की उपस्थिति को कम करके आंका है. राज्य भाजपा प्रवक्ता रूपम गोस्वामी ने कहा कि असम में पार्टी की संगठनात्मक शक्ति कमजोर है. उन्होंने कहा कि यह मूल रूप से झारखंड आधारित पार्टी है जिसका यहां कोई चुनावी रिकॉर्ड नहीं है," उन्होंने आगे कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली कल्याणकारी योजनाओं ने पिछले एक दशक में चाय बागान समुदायों के बीच पार्टी के आधार को मजबूत किया है.
राजनीतिक विशेषज्ञों की क्या है राय
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जेएमएम कांग्रेस के साथ गठबंधन को बनाए रखकर ही यदि चुनाव लड़े तो उन्हें लाभ और बीजेपी को नुकसान हो सकता है. अगर जेएमएम अकेले चुनाव लड़ती है तो उन्हें बस कटे हुए वोट ही प्राप्त हो सकेंगे. वहीं बात भाजपा की करें तो हिमंता बिश्व शर्मा ने जहां 2021 में शानदार जीत हासिल की थी, वहीं 2026 के चुनाव में और भी मजबूत जनादेश का लक्ष्य बना रही है.








