Raipur (Chhattisgarh): सीमित संसाधनों और आर्थिक तंगी के बावजूद खेलो इंडिया एथलीट और झारखंड के युवा वेटलिफ्टर बाबूलाल हेम्ब्रम (19 वर्ष) कठिन परिश्रम और संघर्ष के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं. झारखंड के रामगढ़ जिले के केरिबांदा गांव से आने वाले बाबूलाल आज एक-एक मेडल के साथ अपने सपनों को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं.
पूर्व आर्मी और कोच गुरविंदर सिंह की सलाह पर 2018 में वेटलिफ्टिंग अपनाने वाले बाबूलाल हेंब्रम का शुरुआती दौर काफी संघर्ष और चुनौतीपूर्ण रहा. आर्थिक तंगी और संसाधनों की कमी के बावजूद भी उन्होंने हार नहीं मानी और इस बीच उसने निर्माण स्थलों पर बांस की लकड़ियों और लोहे की रॉड से अभ्यास शुरू किया. इसके बाद बाबूलाल ने झारखंड स्टेट स्पोर्ट्स प्रमोशन सोसाइटी (JSPS) के कोचिंग सेंटर में दाखिला लिया, जिसके लिए उन्हें प्रतिदिन 60 किलोमीटर का सफर तय कर कोच गुरविंदर के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लेना पड़ता था.
बाबूलाल ने बताया कि वह 5 भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं. आर्थिक तंगी हमेशा से उनके परिवार के लिए चुनौतीपूर्ण रही है. मां एक स्थानीय स्कूल में रसोइया का काम करती हैं और पिता छोटे-मोटे काम करते हैं. लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद भी इन परिस्थितियों हार नहीं मानी और उसने खेल के प्रति अपने समर्पण को बनाए रखा.
चेन्नई में आयोजित खेलो इंडिया यूथ गेम्स 2024 में बाबूलाल हेम्ब्रम ने 49 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया. इसके बाद उसने आईडब्ल्यूएफ वर्ल्ड यूथ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप और एशियन जूनियर एवं यूथ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में भी पदक जीता. वहीं वर्तमान समय में बाबूलाल खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीतकर सुर्खियां बटोर रहे हैं. इस उपलब्धि ने बाबूलाल के आत्मविश्वास को बढ़ाने और उन्हें और मजबूती प्रदान की है.
बाबूलाल हेंब्रम इस समय पटियाला में राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर का हिस्सा हैं और सीनियर सर्किट में भारत का प्रतिनिधित्व करने की तैयारी में हैं. बाबूलाल का लक्ष्य कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियन गेम्स और विश्व चैंपियनशिप जैसे बड़े मंचों पर देश का नाम रोशन करना है.









