APP नियुक्ति पर रोक हटाने से हाईकोर्ट का इनकार!, JPSC और सरकार से मांगा जवाब, अब ...
हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए प्रार्थी को अपनी याचिका की प्रति JPSC को सौंपने का निर्देश दिया।

Jharkhand High Court: झारखंड सरकार द्वारा असिस्टेंट पब्लिक प्रॉसिक्यूटर (APP) रेगुलर और बैकलॉग नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक लगाने वाले नोटिफिकेशन को रद्द कराने की मांग को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई। हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए प्रार्थी को अपनी याचिका की प्रति JPSC को सौंपने का निर्देश दिया।
अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 28 अगस्त की तिथि निर्धारित की है। उल्लेखनीय है कि आलोक रंजन, आदित्य भास्कर, आनंद सिंह और अनिरुद्ध ओझा ने विज्ञापन संख्या 6/2025 (रेगुलर) और विज्ञापन संख्या 5/2025 (बैकलॉग) की रोक को चुनौती देते हुए यह याचिका दायर की है।
रोक हटाने से अदालत का इनकार, JPSC और राज्य सरकार से मांगा जवाब
इसी मामले से जुड़ी एक अन्य याचिका पर भी कोर्ट में सुनवाई हुई। असिस्टेंट पब्लिक प्रॉसिक्यूटर रेगुलर परीक्षा नियुक्ति प्रक्रिया रद्द करने के फैसले के खिलाफ अभ्यर्थी सत्यांशु शुभम की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने फिलहाल रोक हटाने से साफ इनकार कर दिया।
इसके साथ ही अदालत ने JPSC और राज्य सरकार से पूरे मामले में विस्तृत जवाब तलब किया है। प्रार्थी की ओर से अदालत में अधिवक्ता रौनक सहाय और श्रीकांत स्वरूप ने पक्ष रखा, जिसके बाद अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर तय की।
CID जांच और TDPL विवाद के बाद सरकार ने लिया था बड़ा फैसला
गौरतलब है कि सीआईडी जांच में सामने आए गंभीर तथ्यों के आधार पर राज्य सरकार ने 18 अगस्त की देर रात उन तमाम परीक्षाओं को रद्द करने का बड़ा फैसला लिया था, जिनके संचालन में TDPL एजेंसी शामिल रही थी। इसके अतिरिक्त सरकार ने वर्ष 2014 से अब तक आयोजित हुई विभिन्न नियुक्ति परीक्षाओं में गड़बड़ी की आशंका को देखते हुए उच्चस्तरीय जांच की भी घोषणा की थी।
कार्मिक विभाग ने जारी की थी अधिसूचना, 22 परीक्षाएं रद्द और कई जांच के दायरे में
सरकार की इस घोषणा के बाद कार्मिक प्रशासनिक विभाग ने विधिवत अधिसूचना जारी की थी। इस अधिसूचना के तहत राज्य भर की कुल 22 नियुक्ति परीक्षाओं को पूरी तरह रद्द कर दिया गया था, जबकि 6 परीक्षाओं की प्रक्रिया पर रोक लगाते हुए उन्हें स्थगित किया गया था। इसके साथ ही 17 अन्य महत्वपूर्ण परीक्षाओं को संदिग्ध मानते हुए जांच के दायरे में शामिल किया गया है, जिसके कारण प्रदेश के हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटका हुआ है।
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