झारखंड में दरोगाओं की सीनियरिटी पर हाईकोर्ट सख्त, इंस्पेक्टर प्रमोशन पर रोक बरकरार
झारखंड हाईकोर्ट ने 2018 में नियुक्त दरोगाओं की सीनियरिटी विवाद पर सुनवाई करते हुए इंस्पेक्टर पद पर प्रोन्नति पर लगी रोक फिलहाल जारी रखी है।

Jharkhand High Court: झारखंड में वर्ष 2018 में नियुक्त सब इंस्पेक्टरों (दरोगाओं) की सीनियरिटी को लेकर चल रहे विवाद में गुरुवार को झारखंड हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई। जस्टिस दीपक रौशन की एकल पीठ ने सीमित विभागीय परीक्षा के जरिए नियुक्त सब इंस्पेक्टरों से इंस्पेक्टर पद पर होने वाली प्रोन्नति पर पहले से लगी रोक को फिलहाल जारी रखा है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने गृह विभाग के माध्यम से सीमित विभागीय परीक्षा से नियुक्त सभी संबंधित दरोगाओं को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 2 सितंबर को होगी।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की वर्ष 2017 की दो अलग-अलग दरोगा भर्ती अधिसूचनाओं से जुड़ा है।
1.विज्ञापन संख्या 05/2017 के तहत खुली प्रतियोगी परीक्षा के जरिए सीधी भर्ती की गई थी।
2. विज्ञापन संख्या 09/2017 के तहत विभाग में कार्यरत कर्मियों के लिए सीमित विभागीय परीक्षा आयोजित कर दरोगा नियुक्त किए गए थे।
दोनों प्रक्रियाओं के तहत चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति वर्ष 2018 में हुई। विवाद तब शुरू हुआ जब विभाग ने जारी सीनियरिटी सूची में विभागीय परीक्षा (09/2017) से नियुक्त दरोगाओं को सीधी भर्ती (05/2017) वाले अधिकारियों से ऊपर स्थान दे दिया।
याचिकाकर्ताओं की क्या दलील है?
याचिकाकर्ता उत्तम तिवारी एवं अन्य की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज टंडन और अधिवक्ता सुमित गाड़ोदिया ने अदालत में पक्ष रखा। उनका कहना है कि सीधी भर्ती का विज्ञापन पहले जारी हुआ था, जबकि विभागीय परीक्षा की अधिसूचना बाद में आई थी। ऐसे में सीनियरिटी तय करते समय नियमों और चयन प्रक्रिया के क्रम का पालन किया जाना चाहिए था।
याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि विभाग द्वारा जारी मौजूदा वरीयता सूची नियमों के अनुरूप नहीं है और इससे सीधे भर्ती वाले अधिकारियों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
हाईकोर्ट का क्या आदेश?
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने इंस्पेक्टर पद पर होने वाली प्रोन्नति पर लगी रोक को बरकरार रखा है। साथ ही गृह विभाग को निर्देश दिया है कि सीमित विभागीय परीक्षा से नियुक्त सभी संबंधित दरोगाओं को नोटिस जारी कर उनका जवाब अदालत में प्रस्तुत कराया जाए। अब इस मामले पर अगली सुनवाई 2 सितंबर को होगी।
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