राघोपुर में गंगा का रौद्र रूप! 100 साल पुराना चैती दुर्गा मंदिर नदी में हुआ विलीन
भागलपुर के नवगछिया स्थित राघोपुर में गंगा का कटाव लगातार तेज हो रहा है। तेज धार में करीब 100 साल पुराना चैती दुर्गा मंदिर नदी में समा गया। बांध और तटबंध के आसपास बढ़ते कटाव से ग्रामीणों में दहशत और आक्रोश है।


भागलपुर: नवगछिया के राघोपुर क्षेत्र में गंगा नदी का कटाव लगातार तेज होता जा रहा है। राघोपुर के जमींदारी बांध के आसपास स्थिति बेहद गंभीर बताई जा रही है। गंगा की तेज धार के बीच करीब 100 वर्ष पुराना चैती दुर्गा मंदिर नदी में समा गया, जिसके बाद स्थानीय लोगों में दहशत और आक्रोश का माहौल है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, गंगा का कटाव लगातार राघोपुर गांव की ओर बढ़ रहा है। मंदिर के नदी में समा जाने के बाद ग्रामीणों को अब अपने घर और दूसरी महत्वपूर्ण संरचनाओं की भी चिंता सताने लगी है।
गंगा की तेज धार में समाया पुराना मंदिर
राघोपुर में गंगा की तेज धार और लगातार हो रहे कटाव के कारण मंगलवार को पुराना चैती दुर्गा मंदिर भी इसकी चपेट में आ गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, मंदिर करीब एक सदी पुराना था और आसपास के लोगों की आस्था से जुड़ा हुआ था। मंदिर के नदी में समाने का दृश्य सामने आने के बाद इलाके में चिंता और बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर कटाव इसी रफ्तार से जारी रहा तो आने वाले समय में कई और घर और जमीन गंगा की धारा में समा सकते हैं।
बांध टूटने के बाद बढ़ी परेशानी
बताया जा रहा है कि राघोपुर गांव में बांध के क्षतिग्रस्त होने के बाद स्थिति और भयावह हो गई है। ग्रामीणों के अनुसार, सैकड़ों घर बाढ़ के पानी की चपेट में आ चुके हैं और कई स्थानों पर लगातार कटाव हो रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि जमींदारी बांध और तटबंध के संवेदनशील हिस्सों पर समय रहते प्रभावी कटावरोधी कार्य नहीं कराया गया। उनका कहना है कि हर वर्ष बाढ़ और कटाव की समस्या सामने आती है, इसके बावजूद स्थायी समाधान की दिशा में अपेक्षित काम नहीं हुआ।
राघोपुर के लोगों ने गंगा कटाव को रोकने के लिए किए जा रहे कार्यों की गुणवत्ता और गति पर भी सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि तेज धार के सामने मौजूदा कटावरोधी उपाय पर्याप्त साबित नहीं हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पहले से संवेदनशील इलाकों को चिन्हित कर मजबूत तैयारी की जाती तो वर्तमान स्थिति को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता था।
दो मंत्रियों का क्षेत्र होने के बावजूद नाराजगी
राघोपुर और आसपास के इलाके से बिहार सरकार के दो मंत्रियों के जुड़े होने का हवाला देते हुए ग्रामीणों में नाराजगी भी देखने को मिल रही है। लोगों का कहना है कि क्षेत्र में हर साल बाढ़ और कटाव का खतरा बना रहता है, ऐसे में पहले से ठोस तैयारी और स्थायी समाधान की जरूरत है। ग्रामीणों का सवाल है कि जब बाढ़ का खतरा हर वर्ष सामने आता है तो तटबंध और कटाव प्रभावित क्षेत्रों को सुरक्षित करने के लिए स्थायी व्यवस्था क्यों नहीं की जाती।
प्रशासन अलर्ट, जल संसाधन विभाग पर सवाल
कटाव की गंभीर स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन के अधिकारी तटबंध और प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी कर रहे हैं। अधिकारियों की ओर से स्थिति पर नजर रखने और आवश्यक कदम उठाने की बात कही जा रही है। हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की निगरानी के बावजूद गंगा का कटाव लगातार बढ़ रहा है। ग्रामीण जल संसाधन विभाग से प्रभावी और तत्काल कटावरोधी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
फिलहाल राघोपुर में गंगा का जलस्तर और कटाव स्थानीय लोगों के लिए बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है। एक पुराने मंदिर के नदी में समाने और बड़ी संख्या में घरों के प्रभावित होने के बाद ग्रामीणों को आशंका है कि अगर कटाव पर जल्द नियंत्रण नहीं पाया गया तो नुकसान का दायरा और बढ़ सकता है।
(भागलपुर से अतीश दीपंकर की रिपोर्ट)

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