बच्चों की वर्दी से लेकर एंबुलेंस तक बेहाल! नेता के वादों से बना है सड़क पर कीचड़ का समंदर
जमुई के गिद्धौर प्रखंड की कोलुहा पंचायत में बारिश के बाद तीन गांवों को जोड़ने वाली सड़क की हालत बदतर हो गई है। घुटने भर कीचड़, गड्ढों और गंदे पानी के बीच ग्रामीणों की आवाजाही मुश्किल है। बच्चों की पढ़ाई से लेकर मरीजों के अस्पताल पहुंचने तक पर इसका असर पड़ रहा है।


जमुई: एक तरफ सरकार "सुशासन और विकास" का ढिंढोरा पीट रही है, तो दूसरी तरफ जमुई के गिद्धौर में तीन गांवों को जोड़ने वाली सड़क कीचड़ का तालाब बन गई है। ना बच्चे स्कूल जा पा रहे है और ना मेज़ अस्पताल पहुँच पा रहे है| विकास के सारे दावे इस सड़क पर आकर दम तोड़ रहे हैं।
ये तस्वीरें हैं गिद्धौर प्रखंड के कोलुहा पंचायत की। सिमरिया, गेरुआडीह और पूर्वी कोलुहा के हजारों लोगों की लाइफलाइन यही सड़क है। लेकिन आज ये सड़क नहीं, कीचड़ और बदबू का दलदल बन चुकी है।
स्कूल जाना भी किसी चुनौती से कम नहीं
बारिश के बाद सड़क पर घुटने भर कीचड़ और गंदा पानी जमा है। जगह-जगह गहरे गड्ढे मुंह बाए खड़े हैं। सड़े हुए कचरे से इतनी दुर्गंध आ रही है कि लोगों का दम घुट रहा है। विभाग के अफसर और जनप्रतिनिधि सब आंख बंद किए बैठे हैं। नतीजा? तीन गांवों के मासूम बच्चे रोज इसी कीचड़ में लथपथ होकर स्कूल जा रहे हैं। वर्दी काली, जूते खराब और सपने चकनाचूर। बीमार लोगों को अस्पताल ले जाना तो दूर, एंबुलेंस भी इस रास्ते से गुजरने से कतराती है।
‘वोट मांगने आते हैं, सड़क बनाने नहीं’
सड़क की हालत को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है। उनका कहना है कि चुनाव के समय नेता और जनप्रतिनिधि गांव में पहुंचते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद सड़क की समस्या पर ध्यान नहीं दिया जाता। ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि जब यही सड़क तीन गांवों के लिए मुख्य रास्ता है, तो इसकी मरम्मत या निर्माण को लेकर अब तक ठोस कदम क्यों नहीं उठाया गया? उनका कहना है "नेता वोट मांगने आते हैं, फोटो खिंचवाकर चले जाते हैं। लेकिन सड़क कोई नहीं बनवाता। क्या हम इसी गंदगी में मरने के लिए पैदा हुए हैं?"
सवाल सीधा है - विकास की बड़ी-बड़ी बातें करने वाली सरकार को इन तीन गांवों के लोग दिखाई क्यों नहीं दे रहे?
(जमुई से विक्रम कुमार विक्रांत)

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