126 किताबें, खुद प्रकाशन और भोजपुरी के लिए पूरा जीवन! जानिए कौन थे हीरा प्रसाद ठाकुर
वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के शोधार्थी डॉ. संजय कुमार ने हीरा प्रसाद ठाकुर की साहित्य साधना पर शोध करते हुए पीएचडी पूरी की है। उन्होंने ठाकुर को भोजपुरी का ‘दधीचि साहित्यकार’ बताते हुए कहा कि उन्होंने 126 पुस्तकों की रचना की और भोजपुरी बाल साहित्य में महत्वपूर्ण योगदान दिया।


आरा: भोजपुरी साहित्य के चर्चित रचनाकार हीरा प्रसाद ठाकुर की साहित्य साधना पर शोध करते हुए वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर भोजपुरी विभाग के शोधार्थी संजय कुमार ने पीएचडी की उपाधि पूरी की है। उन्होंने विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. दिवाकर पांडेय के निर्देशन में अपना शोधकार्य पूरा किया।
126 किताबें लिखीं, खुद प्रकाशित भी कीं
शोधार्थी डॉ. संजय कुमार ने हीरा प्रसाद ठाकुर की साहित्य साधना पर प्रकाश डालते हुए उन्हें ‘भोजपुरी का दधीचि साहित्यकार’ बताया।
उन्होंने कहा कि हीरा प्रसाद ठाकुर ने भोजपुरी में करीब 126 पुस्तकों की रचना की। खास बात यह रही कि उन्होंने अपनी रचनाओं को खुद प्रकाशित कराया और उनका वितरण भी किया।
भोजपुरी बाल साहित्य में भी उनके योगदान को महत्वपूर्ण माना जाता है। उनकी रचनाओं ने भोजपुरी भाषा और साहित्य को समृद्ध करने के साथ बच्चों के लिए साहित्यिक सामग्री उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाई।
शोध मौखिकी में जुटे कई साहित्यकार और शिक्षक
वाह्य परीक्षक के रूप में रांची विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो डॉ जंगबहादुर पाण्डेय मौखिकी में उपस्थित थे। इस मौके पर हिंदी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो रविन्द्र नाथ राय, हिंदी की वर्तमान विभागाध्यक्ष डॉ पुष्पा द्विवेदी, डॉ नवनीत कुमार राय, भोजपुरी साहित्यकार कृष्ण कुमार राय, जयप्रकाश कॉलेज के डॉ अमरेंद्र कुमार सहित विभिन्न विभागों के शिक्षक और शोधछात्र डॉ राजेश कुमार, डॉ यशवंत कुमार सिंह, रवि प्रकाश सूरज, सोहित सिन्हा, मुनमुन कुमार सिंह आदि उपस्थित थे।
हीरा प्रसाद ठाकुर की साहित्य साधना पर किया गया यह शोध भोजपुरी साहित्य के इतिहास और उसके विकास में उनके योगदान को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

specializes in local and regional stories, bringing simple, factual, and timely updates to readers.
Related Posts

कागज नहीं, जमीन के हक की चाबी मिल रही है! ‘अभियान बसेरा’ में 125 लाभुकों को मिला पर्चा

सरकारी काम के लिए अब दौड़ने की जरूरत नहीं! भोजपुर की पंचायत में शुरू हुआ खास शिविर







