पेसा नियमावली को लेकर चंपाई सोरेन ने आदिवासियों को गुमराह करने का लगाया आरोप, आजसू ने कहा- खुद को बचाने के लिए किया लागू
पेसा नियामाली को लेकर झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता चंपाई सोरेन ने राज्य सरकार पर आदिवासियों के साथ सबसे बड़ा धोखा देने का आरोप लगाया है.

Jharkhand (Ranchi): झारखंड में 25 साल बाद पेसा नियमावली लागू कर दी गई है, लेकिन नियमावली के लागू होते ही इसे लेकर सियासत तेज़ हो गई है. खास कर विपक्ष की ओर से लगातार इसको लेकर विरोध जताया जा रहा है. झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता चंपाई सोरेन ने राज्य सरकार पर आदिवासियों के साथ सबसे बड़ा धोखा देने का आरोप लगाया है. रांची स्थित आवास पर आयोजित प्रेस वार्ता में चंपाई सोरेन ने पेसा अधिसूचना की मंशा और उसके शब्दों पर गंभीर सवाल खड़े किए.
प्रेस वार्ता के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने कहा कि झारखंड में वर्षों के लंबे इंतजार के बाद पेसा कानून की अधिसूचना तो जारी कर दी गई, लेकिन इसकी आत्मा को ही खत्म कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि 1996 में लागू हुए पेसा कानून की नियमावली बनाने में 25 साल से ज्यादा का वक्त लगा और इस दौरान झारखंड में सबसे लंबा शासन झामुमो–कांग्रेस–राजद गठबंधन का रहा, जो करीब 7 वर्षों तक सत्ता में रहा. चंपाई सोरेन ने आरोप लगाया कि इतने लंबे शासन के बावजूद गठबंधन सरकार पेसा कानून को उसकी मूल भावना के साथ लागू करने में पूरी तरह विफल रही. उन्होंने कहा कि अधिसूचना के पहले पन्ने में ही शेड्यूल एरिया में रहने वाले आदिवासी और मूलवासी समुदायों के अधिकारों को कमजोर कर दिया गया है.
‘पेसा की मूल भावना को कुचल दिया, आदिवासी समाज को किया गुमराह’
पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आदिवासी समाज सरल और भोला है और इसी भोलेपन का फायदा उठाकर मौजूदा सरकार ने उनके साथ बड़ा विश्वासघात किया है. जिस उद्देश्य से पेसा कानून लाया गया था, वह उद्देश्य अधिसूचना में ही खत्म कर दिया गया है. चंपाई सोरेन ने यह भी कहा कि राज्य की शेड्यूल एरिया की जनता को यह समझ ही नहीं आने दिया गया कि उनके संवैधानिक अधिकारों के साथ क्या किया गया है. उन्होंने सरकार पर पेसा की मूल भावना को कुचलने और आदिवासी समाज को गुमराह करने का आरोप लगाया.

‘सिर्फ हाईकोर्ट के दबाव के कारण आनन-फानन में किया लागू’
वहीं इस पर आजसू के केंद्रीय प्रवक्ता देवशरण भगत ने कहा कि पेसा नियमावली पेश तो कर दिया गया, लेकिन जिस मकसद से इसे बनाया गया था, वह पूरा नहीं हो पाया. पेसा 5वें शेड्यूल एरिया में पंचायत को मजबूत करने के लिए है. शेड्यूल एरिया में आदिवासियों की सभ्यता, परंपरा व जमीन को सुरक्षित करने एवं स्वशासन व्यवस्था को संरक्षित करने के लिए है. केंद्र के द्वारा जो पेसा एक्ट बनाया गया और अभी जो लागू हुआ है, उसमें जो मूल भावना है उसे हटा दिया गया है. सिर्फ हाईकोर्ट के दबाव के कारण आनन-फानन में इसे लागू कर दिया गया. यह जिनके लिए बनाया गया है उनको नहीं बल्कि खुद को बचाने के लिए लागू किया गया है.
पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने भी उठाए थे सवाल
गौरतलब है कि पेसा कानून को लेकर भारतीय जनता पार्टी हेमंत सरकार पर हमलावर है. इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने भी पेसा को लेकर झारखंड सरकार पर सवाल उठाया था. पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने रविवार को कहा कि राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित पेसा नियमावली मूल एक्ट में शामिल जनजातीय चरित्र की हत्या करने वाली है. उन्होंने कहा कि मूल पेसा एक्ट 1996 में ग्राम सभा की अवधारणा में रुढिजन्य विधि परंपरा की बात कही गयी है. झारखंड सरकार को बताना चाहिए कि नियमावली में इसे क्यों नहीं जोड़ा गया है.
‘अब ये लोग झारखंड के आदिवासियों को लूट नहीं पाएंगे, इसलिए हो रहा पेट में दर्द’
इस मुद्दे को लेकर भाजपा पर पलटवार करते हुए झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने सोमवार को कहा कि राज्य के तीन-तीन मुख्यमंत्रियों ने आदिवासी हित के लिए क्या किया. इन्हें पेसा पर बोलने का कोई हक नहीं है. पेसा को लेकर इनकी समझ ही नहीं है. ये लोग क्या बताएंगे. रांची में प्रेस वार्ता कर सुप्रियो भट्टाचार्य ने पूछा कि उड़ीसा और छत्तीसगढ़ में उनकी सरकार है वहां पेसा अभी तक क्यों नहीं लागू हुआ. दरअसल भारतीय जनता पार्टी के लोगों के पेट में इसलिए दर्द हो रहा है कि अब ये लोग झारखंड के आदिवासियों को लूट नहीं पाएंगे. क्योंकि पेसा लागू कर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने यहां के आदिवासियों को मजबूत और सशक्त बनाने का काम किया है.
उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी बिना किसी आधार के अनर्गल बातें कर रही है. राज्य के पहले मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने डोमिसाइल के मुद्दे पर पूरे झारखंड को अस्त-व्यस्त कर दिया था. आदिवासियों के साथ उन्होंने कुठाराघात किया था. रघुवर दास ने तो सीएनटी एसपीटी एक्ट में छेड़छाड़ कर आदिवासियों को धोखा दिया और अर्जुन मुंडा जी ने तो केंद्र में मंत्री रहते हुए खुद की ही जाति को एसटी बना दिया. इसलिए पेसा पर ये लोग कुछ न ही बोले तो बेहतर है.









