नहीं मिली राहत, अब चलेगा मुकदमा!, टेंडर घोटाले के आरोपी इंजीनियर अशोक गुप्ता पर कोर्ट कसेगा कानूनी शिकंजा
झारखंड टेंडर घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में इंजीनियर अशोक कुमार गुप्ता की डिस्चार्ज याचिका PMLA कोर्ट ने खारिज कर दी। अब उनके खिलाफ आरोप गठन और ट्रायल की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

Ranchi: झारखंड के ग्रामीण विकास विभाग में हुए बहुचर्चित टेंडर घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी एग्जीक्यूटिव इंजीनियर अशोक कुमार गुप्ता को रांची स्थित पीएमएलए (PMLA) की विशेष अदालत से तगड़ा झटका लगा है। विशेष अदालत ने आरोपी इंजीनियर की ओर से दाखिल डिस्चार्ज पिटीशन (दोषमुक्त करने की याचिका) को खारिज कर दिया है। कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद अब अशोक कुमार गुप्ता के खिलाफ अदालत में आरोप गठन यानी चार्ज फ्रेम करने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
अब तय होंगे आरोप, चलेगा नियमित ट्रायल
डिस्चार्ज याचिका खारिज होने का सीधा मतलब यह है कि अदालत ने उनके खिलाफ मुकदमे को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त आधार पाए हैं। आने वाले दिनों में अदालत उनके खिलाफ विधिवत आरोप तय करेगी, जिसके बाद गवाही और जिरह की नियमित अदालती सुनवाई शुरू होगी। इस फैसले के बाद आरोपी अधिकारी की कानूनी मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती दिख रही हैं।
सरेंडर के बाद मिली थी सशर्त जमानत
गौरतलब है कि एग्जीक्यूटिव इंजीनियर अशोक कुमार गुप्ता ने इसी साल रांची स्थित PMLA की विशेष अदालत में खुद आत्मसमर्पण (सरेंडर) किया था। सरेंडर करने के बाद अदालत ने उन्हें कुछ कड़ी शर्तों के साथ जमानत दी थी। उस दौरान अदालत ने एक लाख रुपये के निजी मुचलके, पासपोर्ट अदालत में जमा कराने और बिना इजाजत देश न छोड़ने की अनिवार्य शर्त पर राहत दी थी।
ED की पूरक चार्जशीट में बने थे आरोपी
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने टेंडर घोटाले से जुड़े वित्तीय लेनदेन और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के दौरान अपनी सप्लीमेंट्री चार्जशीट में अशोक कुमार गुप्ता को आरोपी बनाया था। एजेंसी का आरोप है कि टेंडर आवंटन और कमीशनखोरी के खेल में इनकी सक्रिय भूमिका रही है। इस मामले में विशेष अदालत के समक्ष ईडी की ओर से विशेष लोक अभियोजक शिव कुमार उर्फ काका जी ने मजबूती से एजेंसी का पक्ष रखा और याचिका का विरोध किया।
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