खाने के समय जुटती है भीड़, बाकी समय सन्नाटा..., रांची में छात्रों के आंदोलन में अब कैसे हैं हालात?
रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्रों का आंदोलन 20वें दिन भी जारी है। धरनास्थल पर अब भीड़ कम नजर आ रही है। AISA के मंच को लेकर भी छात्रों में नाराजगी सामने आई है।

Ranchi Protest: राजधानी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अपनी मांगों को लेकर छात्रों का धरना पिछले 20 दिनों से लगातार जारी है। प्रशासन की ओर से कई बार बातचीत कर आंदोलन खत्म कराने की कोशिशें की गईं, लेकिन छात्र अपनी मांगें पूरी होने तक पीछे हटने को बिल्कुल भी तैयार नहीं हैं। प्रशासन भी धरना स्थल और वहां हो रही गतिविधियों पर लगातार पैनी नजर बनाए हुए है। हालांकि, अब इस आंदोलन में भीड़ पहले जैसी नहीं रही और राजनीतिक संगठनों की एंट्री को लेकर भी छात्रों में भारी नाराजगी देखने को मिली है।
खाने के समय जुटती है भीड़, फिर सन्नाटा
धरना स्थल की मौजूदा स्थिति यह है कि अब वहां छात्रों की संख्या काफी कम हो गई है। जब खाना या अन्य खाने-पीने का सामान बंटने लगता है, तो अचानक काफी भीड़ उमड़ पड़ती है। लेकिन खाना लेने के बाद लोग वहां से अपने घरों की ओर निकल जाते हैं। कई लोग तो केवल खाना या सामान लेने के लिए ही स्टेडियम आते हैं और फिर वापस चले जाते हैं, जिसके चलते धरने में अब पहले जैसी भीड़ नजर नहीं आती है।
AISA की एंट्री और छात्रों का कड़ा विरोध
इसी बीच छात्र आंदोलन को समर्थन देने पहुंचे छात्र संगठन AISA (All India Students Association) के नेताओं और कार्यकर्ताओं की भूमिका को लेकर भी छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा। AISA के सदस्यों ने धरना स्थल पर आकर छात्रों के समर्थन में खड़े होने का दावा किया था। इसके बाद AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा भी रांची पहुंचीं, लेकिन आंदोलनकारी छात्रों ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए उन्हें अपने मंच पर जगह देने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद AISA ने मुख्य धरना स्थल के पास ही अपना एक अलग मंच और टेंट लगा लिया और वहीं से समर्थन देने की बात कही।
राजनीति नहीं चमकी तो समेट लिया अपना टेंट
10 अगस्त को जब विधानसभा घेराव का कार्यक्रम था, तब AISA के कुछ सदस्य धरना स्थल पर पहुंचे जरूर, लेकिन कुछ ही देर बाद वे वहां से गायब हो गए। इसके बाद से AISA के सदस्य अपने खुद के बनाए टेंट में भी नजर नहीं आए। आलम यह है कि अब जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से AISA का वह टेंट और मंच भी पूरी तरह गायब हो चुका है।
छात्रों का दो टूक कहना है कि उनके आंदोलन को किसी राजनीतिक दल या संगठन की बैसाखी की जरूरत नहीं है। छात्रों ने आरोप लगाया कि AISA के लोग केवल उनके आंदोलन के नाम पर अपनी 'राजनीति चमकाने' की कोशिश कर रहे थे। जब उन्हें लगा कि यहां उनकी दाल नहीं गलने वाली, तो वे धीरे-धीरे आंदोलन से किनारा कर गए। छात्रों ने साफ कर दिया है कि उनका यह संघर्ष किसी राजनीतिक संगठन के भरोसे नहीं है, बल्कि वे अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं और मांगें पूरी होने तक डटे रहेंगे।
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