"CID जांच सही तरीके से नहीं हो रही...", JPSC-JSSC परीक्षा रद्द करने और CBI जांच के लिए हाईकोर्ट में PIL दायर
JPSC-JSSC परीक्षा में कथित धांधली को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में PIL दाखिल हुई है। याचिका में CID जांच पर सवाल उठाते हुए CBI जांच और परीक्षाएं रद्द करने की मांग की गई। मामले पर 23 सितंबर को सुनवाई होगी।

JPSC JSSC Scam : झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं में हुई गड़बड़ी का मामला अब पूरी तरह से अदालत के चौखट पर पहुंच गया है। परीक्षाओं में हुई धांधली की निष्पक्ष जांच कराने को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। JPSC के अभ्यर्थी वसंत कुमार की ओर से दाखिल इस याचिका में आयोग के अधिकारियों और परीक्षा कराने वाली एजेंसी की भूमिका की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी या CBI से कराने की मांग की गई है।
CID जांच पर उठाए सवाल, पेपर लीक और धांधली का आरोप
याचिकाकर्ता ने अदालत से गुहार लगाते हुए कहा है कि इन परीक्षाओं में न सिर्फ प्रश्न पत्र लीक हुए, बल्कि पैसे लेकर नियुक्तियां भी की गई हैं। याचिका में कहा गया है कि हालांकि राज्य सरकार ने परीक्षा में गड़बड़ियों की बात स्वीकार की है और मामले की जांच CID को सौंपी है, लेकिन CID की जांच सही दिशा में और निष्पक्ष तरीके से नहीं हो रही है। यही वजह है कि अभ्यर्थियों को न्याय पाने के लिए अदालत का रुख करना पड़ा है।
सुप्रीम कोर्ट में भी पहले से दायर है याचिका
गौरतलब है कि JPSC की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में हुई धांधली को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दाखिल की जा चुकी है। सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन की ओर से दायर इस याचिका में 19 अप्रैल को आयोजित हुई प्रारंभिक परीक्षा की पूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच कराने की मांग की गई है। इस याचिका में खासतौर पर प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, OMR शीट की कस्टडी और मूल्यांकन में हुई अनियमितताओं की जांच CBI या सुप्रीम कोर्ट अथवा किसी अन्य हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में गठित स्वतंत्र कमेटी से कराने का आग्रह किया गया है।
प्रारंभिक परीक्षा रद्द करने की मांग, 23 सितंबर को अगली सुनवाई
इधर, प्रारंभिक परीक्षा (PT) को रद्द करने की मांग को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में एक अन्य याचिका अभ्यर्थी राजेश प्रसाद द्वारा दाखिल की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि आयोग ने कट-ऑफ मार्क्स जारी करने, OMR शीट अपलोड करने और परीक्षा परिणाम में सक्षम अधिकारियों के हस्ताक्षर न होने जैसी कई गंभीर लापरवाहियां की हैं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश और हरियाणा के 418 अभ्यर्थियों के चयन पर भी सवाल उठाए गए हैं। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और JPSC को 4 सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर को निर्धारित की गई है।
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