रांची : रांची के प्रभात तारा मैदान में बीते शुक्रवार को आयोजित आदिवासी हुंकार महारैली में उस वक्त हंगामा मच गया जब मंच पर ही निशा भगत और रैली के आयोजकों के बीच तीखी नोकझोंक हो गई. यह रैली कुड़मी समुदाय को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा दिए जाने के विरोध में आयोजित की गई थी, लेकिन मंच पर हुई यह अप्रत्याशित घटना अब नए विवाद का कारण बन गई है.
निशा भगत, जो लंबे समय से आदिवासी समाज के मुद्दों पर मुखर रही हैं, ने शनिवार को एक प्रेस वार्ता कर अपने ऊपर हुए व्यवहार को लेकर कड़ा बयान दिया. उन्होंने रैली के आयोजकों - गीता श्री उरांव, प्रेम शाही मुंडा और देव कुमार धान - पर ईसाई तुष्टिकरण का आरोप लगाया. निशा ने कहा, “मुझे पहले से पूर्वाभास था कि कार्यक्रम में मेरे साथ ऐसा व्यवहार हो सकता है, लेकिन लोगों की इच्छा थी कि मैं रैली में शामिल होऊं, इसलिए मैं वहां गई.”
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग आदिवासी एकता के नाम पर समुदाय के भीतर धार्मिक विभाजन पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं. निशा के अनुसार, “रैली का मकसद कुड़मी समुदाय के ST दर्जे का विरोध था, लेकिन मंच पर व्यक्तिगत और धार्मिक आधार पर हमले किए गए, जो दुर्भाग्यपूर्ण है.”
रैली के आयोजकों ने हालांकि अभी तक निशा भगत के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद न केवल झारखंड की आदिवासी राजनीति को प्रभावित कर सकता है बल्कि आने वाले दिनों में राज्य के विभिन्न जनजातीय संगठनों के बीच मतभेदों को भी बढ़ा सकता है.
अब देखना यह होगा कि यह विवाद सुलह के रास्ते पर जाता है या फिर झारखंड की आदिवासी राजनीति में एक नई दरार खोलने का काम करता है.









