CM Hemant Soren Assam Visit: असम में होने वाले 2026 के चुनाव को लेकर राज्य में सियासत गरमाई हुई है. विभिन्न बयानबाजियों के बीच संयोगवश झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी असम में कदम रखा. बीते झारखंड विधानसबा चुनाव के दौरान असम के सीएम हिमंता बिश्व सरमा रांची आए थे. उनका उद्देश्य था- हेमंत सोरेन को सत्ता से बेदखल करना, जो पूरा न हो सका और महागठबंधन एक बार फिर झारखंड की सत्ता पर आसीन हो गई. इसी दौरान सीएम ने वादा किया था कि सही समय आने पर वह इसका जवाब जरूर देंगे.

आदिवासी महासभा का करने पहुंचे थे संबोधन
इसी वादे को पूरा करने वह असम पहुंचे. अवसर था आदिवासी स्टूडेंट एसोसिएशन की ओर से आयोजित आदिवासी महासभा का आयोजन. जिसमें अपना संबोधन दिया और हिमंता बिश्व सरमा पर जमकर निशाना साधा. हेमंत सोरेन ने रविवार को असम में चुनाव अभियान की शुरुआत की और हिमंत बिस्वा सरमा को उनके घर में जाकर चुनौती दी.

आदिवासियों को बांटने का लगाया आरोप
हेमंत सोरेन ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिश्व सरमा पर बिना नाम लिये खूब निशाना साधा. हेमंत सोरेन ने कहा कि यहां आदिवासी समाज को बांटने का काम किया गया है. प्रवासी आदिवासियों के साथ भेदभाव किया गया है. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में असम में विधानसभा का चुनाव होगा. चुनाव में 5 सालों का हिसाब होता है जनता उनसे हिसाब लेगी. चुनाव कब होगा ये हमें पता नहीं, आपको भी पता नहीं है लेकिन जो सत्ता में बैठे हुए है उन्हें जरूर पता होता है. एसआईआर के नाम पर वोट चोरी नहीं बल्कि वोट डकैती की जा रही है. झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा, पश्चिम बंगाल के आये प्रवासी लोगों के साथ असम में अन्याय किया जाता है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि भारत देश में रहते हुए असम के आदिवासी अपना हक अधिकार अपना मान्यता के लिए संघर्ष कर रहा है. ये तो बड़ी विचित्र बात है.

"सत्ता पर बैठे लोग सामाजिक नहीं, व्यापारी हैं"
हेमंत सोरेन ने कहा कि आज जो लोग देश और असम में सत्ता है. ये सामाजिक लोग नहीं है. ये लोग व्यापारी व्यापारी है. उन्होंने कहा कि एक बहुत बड़ा विद्वान व्यक्ति था चाणक्य. चाणक्य कहते थे कि जिस देश का राजा व्यापारी होगा, उस देश की प्रजा भिखारी होगी. आज देश की अर्थव्यवस्था का जो हालत है, ये किसी से छिपी नहीं है. आज रुपया सिर के बल खड़ा है. देश-दुनिया में रुपये की वैल्यू घट गयी है. अभी देश के अंदर सिर्फ गुब्बारे के जैसा हवा भरा हुआ है. देश की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं है. आज महंगाई आसमान छू रही है. जूता, चप्पल, नमक, तेल, लिखाई-पढ़ाई का कागज और कलम सब महंगा हो गया है.
"आसमान छू रही है महंगाई"
सीएम हेमंत सोरेन ने कहा - 'महंगाई कम करने के नाम पर ये लोग सत्ता में आ गए थे. लेकिन महंगाई कम नहीं हुई. ये लोग सत्ता में कितना झूठ बोल कर आये है. बोले थे सब के खाते में 15 लाख आएगा. आया क्या? बल्कि जितना घर में पैसा था नोटबंदी करके सब निकाल लिया गया. इसको कहते आर्थिक मार, और आर्थिक स्थिति किसी भी घर की रीढ़ की हड्डी होता है. किसी भी आदमी की रीढ़ की हड्डी निकाल दीजिए, तो खड़ा नहीं हो पाएगा, गिर जाएगा. यही नोटबंदी, जीएसटी, महंगाई उसी का कारण है. आपके जेब में एक रुपया भी ना बचे, ऐसे-ऐसे कानून बनाते हैं.'
चाय उद्योग आदिवासियों के खून-पसीने से चलता है
असम की स्थिति पर बात करते हुए हेमंत सोरेन ने कहा कि देश का चाय उद्योग आदिवासियों के खून-पसीने से चलता है, लेकिन वही आदिवासी आज हाशिये पर हैं. उन्हें न्यूनतम मजदूरी तक नहीं मिलती. जो लोग खुद को आदिवासियों का हितैषी बताते हैं, वे कभी नहीं चाहते कि आदिवासी समाज मजबूत हो. क्योंकि अगर आदिवासी, दलित और पिछड़े मजबूत हो गए, तो वे अपने अधिकारों की बात करेंगे और सामंतों से सवाल पूछेंगे.
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि आज देश की संवैधानिक संस्थाएं सत्ता के इशारों पर काम कर रही हैं. वोटर पुनरीक्षण के नाम पर गरीबों से वोट का अधिकार छीना जा रहा है. महंगाई, बेरोजगारी और शोषण बढ़ता जा रहा है. ऐसे में आदिवासी समाज को संगठित होकर राजनीतिक जवाब देने के लिए तैयार रहना होगा.
राज्य को मिले संसाधनों का सही मूल्य
झारखंड ने देश को बहुत कुछ दिया है. अब समय आ गया है कि राज्य को उसके संसाधनों का सही मूल्य मिले. महिलाओं को सशक्त करने की योजनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आज लाखों महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी हो रही हैं.
माना जा रहा है कि असम चुनाव में इस बार जेएमएम का उम्मीदवार भी चुनावी मैदान में उतारा जाएगा. महासभा की समाप्ति के बाद हेमंत सोरेन जिंदाबाद के खूब नारे लगे.








