रांची अंचल कार्यालय में पार्षदों और आंगनबाड़ी सेविकाओं में हुई भिड़ंत, मेयर ने किया हस्तक्षेप
शहर अंचल कार्यालय (टाउन सीओ) द्वारा सरकारी योजनाओं के सुचारू रूप से सत्यापन और बेहतर समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से बुलाई गई बैठक गुरुवार को हंगामे की भेंट चढ़ गई। टाउन सीओ की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में 18 वार्डों के पार्षद और संबंधित क्षेत्रों की आंगनबाड़ी सेविकाओं को आमंत्रित किया गया ।

शहर अंचल कार्यालय (टाउन सीओ) द्वारा सरकारी योजनाओं के सुचारू रूप से सत्यापन और बेहतर समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से बुलाई गई बैठक गुरुवार को हंगामे की भेंट चढ़ गई। टाउन सीओ की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में 18 वार्डों के पार्षद और संबंधित क्षेत्रों की आंगनबाड़ी सेविकाओं को आमंत्रित किया गया था। लेकिन इस बैठक के बाद एक बात साफ हो गई है कि जनप्रतिनिधि और कर्मचारियों के बीच अभी समन्वय स्थापित नहीं हुआ है । विवाद की मुख्य वजह: 'मईया सम्मान योजना' का फॉर्म बैठक के दौरान विवाद तब शुरू हुआ जब 'मईया सम्मान योजना' के सत्यापन फॉर्म पर चर्चा हुई। वार्ड पार्षदों ने आपत्ति जताई कि योजना के फॉर्म में पार्षदों के सत्यापन का कॉलम मौजूद नहीं है। पार्षदों का तर्क था कि पूर्व में भी जन प्रतिनिधियों के पास योजनाओं के सत्यापन का अधिकार रहा है, जिसे इस बार अनदेखा किया गया है। 'हम पार्षदों की चपरासी नहीं'—सेविका के बयान पर भड़का गुस्सा बहस ने तब उग्र रूप ले लिया जब एक सेविका ने तीखी टिप्पणी करते हुए कह दिया कि "सेविकाएं पार्षदों की चपरासी नहीं हैं।" इस अमर्यादित भाषा के प्रयोग से वार्ड पार्षद आक्रोशित हो गए। पार्षदों का कहना था कि जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विरोध स्वरूप सभी 18 पार्षद बैठक का बहिष्कार करते हुए अंचल कार्यालय से बाहर निकल गए। अधिकारों की लड़ाई: सिस्टम बनाम जनप्रतिनिधि सेविकाओं का अपना तर्क है। उन्होंने कई मुद्दों को लेकर सवाल खड़े किए। बीते तीन वर्षों से ज़मीनी स्तर पर सारी मेहनत उन्होंने की है। योजनाओं के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी आगे भी उन्हीं के पास रहनी चाहिए। सिस्टम में अचानक बदलाव से उनके काम में हस्तक्षेप बढ़ रहा है। दूसरी ओर, पार्षदों का मानना है कि जनप्रतिनिधि होने के नाते योजनाओं के चयन और सत्यापन में उनकी भूमिका अनिवार्य है। उनके अनुसार, वर्तमान सिस्टम में किए जा रहे बदलावों का विपरीत असर हो रहा है। मेयर रोशनी खलखो ने संभाला मोर्चा हंगामे की सूचना मिलते ही रांची की मेयर रोशनी खलखो मौके पर पहुँचीं। उन्होंने बीच-बचाव करते हुए मामला शांत कराने का प्रयास किया। मेयर ने आंगनबाड़ी सहायिका, संयोजिका और पार्षदों से बातचीत कर उन्हें समझाने की कोशिश की ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ आम जनता तक पहुँचने में कोई बाधा न आए। फिलहाल, अंचल कार्यालय में स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में है। यह विवाद इस बात को स्पष्ट करता है कि प्रशासनिक कार्यों और जन प्रतिनिधियों के बीच 'पावर शेयरिंग' को लेकर अभी भी स्पष्टता की कमी है।
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