झारखंड हाईकोर्ट से 105 पूर्व पुलिसकर्मियों को बड़ी राहत, ट्रेनिंग खर्च वसूली का आदेश रद्द, 12 हफ्ते में लौटानी होगी रकम
झारखंड उच्च न्यायालय ने पुलिस विभाग से त्यागपत्र दे चुके 105 पूर्व कर्मियों को बड़ी कानूनी राहत दी है।

Ranchi: झारखंड उच्च न्यायालय ने पुलिस विभाग से त्यागपत्र दे चुके 105 पूर्व कर्मियों को बड़ी कानूनी राहत दी है। झारखंड हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने समादेष्टा (कमांडेंट), इंडियन रिजर्व बटालियन (IRB) द्वारा जारी उस आदेश को पूरी तरह निरस्त कर दिया है, जिसके तहत सेवा से इस्तीफा देने के बाद इन पूर्व जवानों से उनके प्रशिक्षण (ट्रेनिंग) पर हुए खर्च की राशि वसूल ली गई थी। विभाग द्वारा प्रत्येक पूर्व पुलिसकर्मी से लगभग 3-3 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि काटी गई थी।
12 सप्ताह के भीतर लौटानी होगी राशि, देरी पर 6% ब्याज का निर्देश
अदालत ने प्रार्थी और राज्य सरकार दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद प्रवण लकड़ा सहित 105 पूर्व जवानों द्वारा दायर याचिका को विधिवत स्वीकार कर लिया। हाईकोर्ट ने पुलिस विभाग को कड़ा निर्देश दिया कि त्यागपत्र के उपरांत ट्रेनिंग मद में काटी गई पूरी राशि का भुगतान सभी प्रार्थियों को 12 सप्ताह के भीतर अनिवार्य रूप से कर दिया जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समय-सीमा के भीतर राशि वापस नहीं की जाती है, तो विभाग को 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज के साथ यह राशि लौटानी होगी।
पीएम फॉर्म 106 बनाम पुलिस मैनुअल नियम 665 पर कानूनी बहस
सुनवाई के दौरान पुलिस विभाग की ओर से दलील दी गई थी कि पुलिस मैनुअल (PM) फॉर्म 106 के प्रावधानों के अनुसार, यदि कोई पुलिसकर्मी अपनी ट्रेनिंग पूरी होने के 3 वर्ष के भीतर सेवा से त्यागपत्र देता है, तो विभाग द्वारा उसके प्रशिक्षण पर खर्च की गई पूरी राशि वसूलने का नियम है। इसके विपरीत, प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता दिवाकर उपाध्याय ने जोरदार पक्ष रखते हुए अदालत को बताया कि झारखंड पुलिस मैनुअल के नियम 665 के तहत 3 वर्ष की अवधि की गणना नियुक्ति की वास्तविक तिथि से की जाती है, न कि ट्रेनिंग समाप्ति की तिथि से। इसके अलावा, सेवा में योगदान के समय प्रार्थियों से फॉर्म 106 पर कोई हस्ताक्षर भी नहीं कराया गया था, इसलिए यह नियम उन पर बाध्यकारी नहीं होता।
2019 में IRB में बहाली और 2023 में अन्य सरकारी सेवाओं में चयन
मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, सभी प्रार्थी वर्ष 2019 में झारखंड पुलिस अंतर्गत आईआरबी (IRB) के विभिन्न बटालियनों में नियुक्त हुए थे। इसके बाद उन्हें हजारीबाग के पद्मा प्रशिक्षण केंद्र भेजा गया था। पुलिस मैनुअल के तहत यह प्रशिक्षण 6 माह में पूर्ण होना था, लेकिन प्रशासनिक कारणों से इसे पूरा होने में 2021 तक का समय लगा। इसके बाद वर्ष 2023 में इन कर्मियों का चयन झारखंड सरकार के अन्य विभागों (जैसे पंचायत सचिव, शिक्षक आदि) में विभिन्न पदों पर हो गया। बेहतर अवसर मिलने पर इन जवानों ने पुलिस विभाग से विधिवत इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद आईआरबी समादेष्टा ने ट्रेनिंग खर्च की आड़ में प्रत्येक कर्मी के खाते से करीब 3 लाख रुपये की रिकवरी कर ली थी, जिसे अब अदालत ने अवैध करार देकर रद्द कर दिया है।

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