बामसेफ और भारत मुक्ति मोर्चा करेंगे RSS मुख्यालय का घेराव, सरकार पर संविधान के खिलाफ जाने का लगाया आरोप
बामसेफ और भारत मुक्ति मोर्चा ने आरएसएस कार्यालय का घेराव करने का निर्णय लिया है. उनके द्वारा इल्जाम लगाया जा रहा है कि भाजपा संविधान के विरुद्ध कार्य कर रही है.

JHARKHAND (GIRIDIH): आरएसएस और भाजपा पर संविधान पर हमला और लोकतंत्र को कुचलने का आरोप लगा बामसेफ (BAMCEF) और भारत मुक्ति मोर्चा ने आरएसएस का मुख्यालय घेरने का निर्णय लिया है.
बुधवार को बामसेफ और भारत मुक्ति मोर्चा के सदस्यों प्रवीण कुमार, दिलीप कुमार, जय नारायण दास, मुकेश गौतम, राजेश दास, मंसूर अंसारी और दिनेश दास के साथ मुख्तार अंसारी समेत कई ने डीसी को ज्ञापन सौंपा. इस दौरान संगठनों के सदस्यों ने कहा बामसेफ़ और भारत मुक्ति मोर्चा ने राष्ट्रीय अधिवेशन का आयोजन किया था. जिसे भारत सरकार ने रद्द कर दिया. लिहाजा, इसी के खिलाफ दोनों संगठनों ने 22 फरवरी को नागपुर में आरएसएस के मुख्यालय का घेराव करने का निर्णय लिया है.
उनका सवाल है कि क्यों आरएसएस के संकेत पर भारत सरकार लोकतंत्र को कुचल रही है, और संविधान को दरकिनार करने का प्रयास किया जा रहा है. सदस्यों ने बताया कि आरएसएस के मुख्यालय घेराव कार्यक्रम में पूरे देश से एससी और हजारों की संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोगों का जुटाव होगा.
बताते चलें कि बामसेफ और भारत मुक्ति मोर्चा संगठन कई सालों बाद एक बार फिर सक्रिय हुआ है. डीसी को सौंपे गए ज्ञापन में सदस्यों ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19 और 14 का उल्लंघन करने पर भारत सरकार आमादा है.
बामसेफ क्या है?
बामसेफ (BAMCEF) का पूरा नाम अखिल भारतीय पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक समुदाय कर्मचारी महासंघ (Backward And Minority Communities Employees Federation) है, जो अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और धर्मांतरित अल्पसंख्यकों के शिक्षित कर्मचारियों का एक संगठन है, जिसकी स्थापना 1971 में कांशीराम, डी. के. खापर्डे और दीनाभाना ने की थी और 1978 में औपचारिक रूप से शुरू हुआ, जिसका उद्देश्य समानता और न्याय पर आधारित समाज बनाना है. यह एक गैर-राजनीतिक और गैर-धार्मिक संगठन है जो ब्राह्मणवादी व्यवस्था को खत्म कर संवैधानिक मूल्यों को स्थापित करना चाहता है.
रिपोर्ट: मनोज कुमार पिंटू









