नवादा में 539 शिक्षकों पर देर से ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने पर स्पष्टीकरण, स्कूलों में मचा हड़कंप
नवादा में सरकारी स्कूल के 539 शिक्षकों से स्पष्टीकरण मांगा गया है दरअसल, ये वो शिक्षक हैं जो स्कूल में देरी से अपना ई-हाजिरी यानी ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कर रहे हैं. इन सभी को 24 घंटे के भीतर कारण बताने को कहा है. विभाग की इस कार्रवाई से उनमें हड़कंप मच गया है.

Bihar (Nawada): बिहार के नवादा जिले में कई सरकारी स्कूल के लेटतलीफी शिक्षकों पर बड़ा एक्शन लिया गया है. ये शिक्षक स्कूल में देरी से अपना ई-हाजिरी यानी ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कर रहे हैं. बता दें, बीते दिन यानी मंगलवार (6 जनवरी 2026) को जिला शिक्षा पदाधिकारी द्वारा शिक्षाकोष की मॉनिटरिंग की गई. जिसमें कुल 539 शिक्षक दोषी पाए गए. अब इन शिक्षकों से शिक्षा विभाग की तरफ से स्पष्टीकरण मांगा गया है और सभी को 24 घंटे के भीतर कारण बताने को कहा है. विभाग की इस कार्रवाई से शिक्षकों के बीच हड़कंप मच गया है.
विभाग ने स्पष्ट रुप कहा है कि स्कूल में देरी से ई-हाजिरी दर्ज करने वाले सभी शिक्षकों को 24 घंटे के भीतर जवाब देना होगा, अन्यथा उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी. क्योंकि यह विभागीय नियमों का उल्लंघन है. इससे यह पता चलता है कि शिक्षक कोष पोर्टल का सही इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है. देरी से ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने वाले शिक्षकों को बार-बार सख्ती और निर्देश दिए जाते रहे लेकिन उनकी आदतें जैसी की तैसी रहीं. इससे पहले भी उनसे कई बार स्पष्टीकरण मांगा गया लेकिन उनकी आदतों में कोई सुधार नहीं आया.
रिपोर्टों के अनुसार स्थिति कुछ इस प्रकार है:
क्या हुआ ?
नवादा जिले में सरकारी स्कूलों के ई-शिक्षाकोष/ई-हाजिरी पोर्टल पर ऑनलाइन उपस्थिति (attendance) समय पर न दर्ज करने वाले एक बड़े समूह (सैकड़ों में) शिक्षकों से शिक्षा विभाग ने स्पष्टीकरण मांगा है. एक रिपोर्ट में यह संख्या लगभग 539 शिक्षक बतायी जा रही है, जिन्हें उपस्थिति देर से दर्ज करने के कारण विभाग ने कारण बताओ (show cause) नोटिस भेजा है जिससे सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई है. इससे पहले भी कुछ गलत रिकॉर्डिंग/टाइमिंग के आधार पर 393 शिक्षकों से स्पष्टीकरण मांगा गया था.
क्यों यह मुद्दा गंभीर माना जा रहा है ?
ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर समय पर उपस्थिति दर्ज करना सरकार की नई व्यवस्था है ताकि शिक्षकों की वास्तविक उपस्थिति को डिजिटल रूप से ट्रैक किया जा सके (जैसे GPS/सेल्फी आधारित रिकॉर्ड).
विभाग को जानकारी मिली है कि कुछ शिक्षकों ने या तो समय पर हाजिरी नहीं लगाई या तकनीकी कारणों को बहाना बनाकर उपस्थिति विलंब से की. जो नियमों के खिलाफ है.
स्थानीय स्तर पर यह आरोप भी हैं कि ऐप में तकनीकी खामियों का फायदा उठाकर कुछ शिक्षक वास्तविक विद्यालय में उपस्थित रहे बिना ही उपस्थिति लगा रहे हैं, जिससे विभाग सख्ती से निपटना चाहता है.
सरकार का रुख
अब शिक्षा विभाग ने बड़ी संख्या में शिक्षकों से लिखित स्पष्टीकरण मांगा है, यदि जवाब संतोषजनक नहीं मिलता है तो विभाग आगे अनुशासनात्मक कार्रवाई जैसे वेतन रोकने या अन्य कदम उठा सकता है.
रिपोर्ट- सोनू सिंह









