'छत से टपकता पानी, बूथ में जलजमाव...', रांची के अल्बर्ट एक्का चौक पर बेबस दिखे ट्रैफिक जवान, कैसे संभलेगी रफ्तार?
पिछले 24 घंटे से हो रही झमाझम बारिश ने शहर की ट्रैफिक व्यवस्था संभालने वाले इन्हीं जवानों के पसीने छुड़ा दिए हैं। बारिश के पानी ने जहां एक तरफ सड़कों को तरबतर कर दिया है

Ranchi Traffic Police: राजधानी रांची की सड़कों पर हर दिन हजारों गाड़ियों का रेला दौड़ता है। कड़ी धूप हो, कड़ाके की ठंड हो या फिर मूसलाधार बारिश-ट्रैफिक पुलिस के जवान अपनी परवाह किए बिना चौक-चौराहों पर मुस्तैद रहते हैं। लेकिन पिछले 24 घंटे से हो रही झमाझम बारिश ने शहर की ट्रैफिक व्यवस्था संभालने वाले इन्हीं जवानों के पसीने छुड़ा दिए हैं। बारिश के पानी ने जहां एक तरफ सड़कों को तरबतर कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ शहर के सबसे व्यस्तम इलाकों में से एक अल्बर्ट एक्का चौक पर बने ट्रैफिक पुलिस प्वाइंट की बदहाली की पोल खोलकर रख दी है।

ट्रैफिक बूथ बना 'स्विमिंग पूल', खड़ा होना भी हुआ दुश्वार
बारिश का पानी सिर्फ सड़कों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि अल्बर्ट एक्का चौक स्थित ट्रैफिक पुलिस बूथ के अंदर तक जा घुसा है। आलम यह है कि जर्जर छत से लगातार टपक रहे पानी की वजह से पूरे प्वाइंट के अंदर जलजमाव की स्थिति बन गई है। जिस जगह पर जवानों को बैठकर या खड़े होकर राहत की दो सांसें लेनी चाहिए थीं, वहां अब पैर रखने की जगह तक नहीं बची है। जवानों के लिए इस जलमग्न बूथ के अंदर खड़ा होना भी मुश्किल हो चुका है।

एक हाथ में छाता और दूसरे से पानी निकालने की कसरत
मूसलाधार बारिश के बीच जब हमारी टीम ने इस ट्रैफिक प्वाइंट का जायजा लिया, तो वहां का नजारा हैरान कर देने वाला था। जवानों को बाहर की बेकाबू ट्रैफिक व्यवस्था संभालने के साथ-साथ अपने ही बूथ से पानी बाहर निकालने की दोहरी मशक्कत करनी पड़ रही थी। कुछ जवान सिर पर छाता ताने सड़क पर गाड़ियों को रास्ता दिखाते नजर आए, तो कुछ अपनी ड्यूटी छोड़कर बूथ के अंदर जमा पानी को बाहर उलीचते दिखे। जिन हाथों में ट्रैफिक कंट्रोल करने की सीटी होनी चाहिए, वे हाथ अपने कार्यस्थल को सूखा रखने की जद्दोजहद में लगे थे।

कागजी साबित हुए मानसून के दावे, उठ रहे तीखे सवाल
अल्बर्ट एक्का चौक के आसपास मौजूद स्थानीय लोगों और दुकानदारों में भी इस बदहाली को लेकर भारी गुस्सा है। लोगों का कहना है कि अगर शहर के मुख्य दिल कहे जाने वाले अल्बर्ट एक्का चौक पर ट्रैफिक पुलिस प्वाइंट का यह हाल है, तो बाकी इलाकों की स्थिति समझी जा सकती है। अब बड़ा सवाल यह उठता है कि बारिश की शुरुआत से पहले नगर निगम और संबंधित विभाग द्वारा जल निकासी और बुनियादी सुविधाओं को लेकर किए गए बड़े-बड़े दावे आखिर कहां गुम हो गए? क्या आला अधिकारियों की नजर इन जवानों की मजबूरी पर पड़ेगी या फिर इस बार भी वे इसी तरह टपकती छत और भरे पानी के बीच ड्यूटी करने को मजबूर रहेंगे?
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