CHC में फोर्थ ग्रेड कर्मी के टांका लगाने की वायरल तस्वीर से उठे सवाल! कहाँ थे संबंधित स्वास्थ्यकर्मी?
मोतिहारी के पहाड़पुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से जुड़ी एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल है। दावा है कि फोर्थ ग्रेड कर्मचारी मरीज के घाव पर टांका लगा रहा है।


मोतिहारी: पूर्वी चंपारण के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहाड़पुर से जुड़ी एक तस्वीर इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। वायरल तस्वीर को लेकर दावा किया जा रहा है कि कृष्णा नाम का एक फोर्थ ग्रेड कर्मचारी मरीज के घाव पर टांका लगा रहा है। तस्वीर सामने आने के बाद अस्पताल की कार्यप्रणाली और मरीजों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
हालांकि, वायरल तस्वीर की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। यह भी अभी स्पष्ट नहीं है कि तस्वीर कब की है, उसमें दिखाई दे रहा व्यक्ति वास्तव में किस पद पर कार्यरत है और मरीज का उपचार किन परिस्थितियों में किया जा रहा था। ऐसे में पूरे मामले की सच्चाई जांच के बाद ही सामने आने की बात कही जा रही है।
फोर्थ ग्रेड कर्मचारी को इलाज की जिम्मेदारी किसने दी?
वायरल तस्वीर को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि तस्वीर में दिखाई दे रहा व्यक्ति वास्तव में फोर्थ ग्रेड कर्मचारी है, तो उसे मरीज के उपचार या टांका लगाने जैसी चिकित्सकीय प्रक्रिया में शामिल होने की अनुमति किसने दी।
यह भी जांच का विषय है कि जिस समय मरीज का उपचार किया जा रहा था, उस वक्त सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सक या प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी मौजूद थे या नहीं। यदि डॉक्टर या संबंधित स्वास्थ्यकर्मी ड्यूटी पर थे, तो मरीज के उपचार की जिम्मेदारी किसी अन्य कर्मचारी तक कैसे पहुंची, यह भी जांच में स्पष्ट होना जरूरी है।
अस्पताल पहुंचने वाले मरीज इलाज के लिए चिकित्सकों और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों पर भरोसा करते हैं। ऐसे में किसी ऐसे कर्मचारी द्वारा चिकित्सकीय प्रक्रिया किए जाने की तस्वीर सामने आना, जिसकी योग्यता को लेकर सवाल उठ रहे हैं, अस्पताल की निगरानी और ड्यूटी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
ड्यूटी, योग्यता और उस दिन की उपस्थिति की हो जांच
मामले को लेकर स्वास्थ्य विभाग के वरीय अधिकारियों से वायरल तस्वीर को संज्ञान में लेकर जांच कराने की मांग की जा रही है। जांच में कथित कर्मचारी की पदस्थापना, शैक्षणिक एवं तकनीकी योग्यता, ड्यूटी चार्ट और संबंधित दिन की उपस्थिति की जानकारी जुटाई जा सकती है।
इसके साथ ही यह भी पता लगाना जरूरी होगा कि तस्वीर में दिखाई दे रहा मरीज कौन था और उसका उपचार किस डॉक्टर या स्वास्थ्यकर्मी की देखरेख में किया जा रहा था। उस समय केंद्र पर तैनात चिकित्सक, एएनएम, जीएनएम और अन्य कर्मचारियों से भी पूछताछ के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि उपचार निर्धारित प्रक्रिया और प्रोटोकॉल के तहत हुआ था या नहीं।
सिविल सर्जन ने लिया संज्ञान, जांच के बाद होगी कार्रवाई
वायरल तस्वीर का मामला सामने आने के बाद पूर्वी चंपारण के सिविल सर्जन डॉ. दिलीप कुमार ने इसे गंभीरता से लेने की बात कही है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी और जांच में जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अब स्वास्थ्य विभाग की जांच पर लोगों की नजर है। यदि जांच में यह प्रमाणित होता है कि किसी अनधिकृत कर्मचारी से चिकित्सकीय प्रक्रिया कराई गई थी, तो संबंधित कर्मचारी के साथ-साथ उसे ऐसी जिम्मेदारी देने वाले लोगों की भूमिका की भी जांच जरूरी होगी।
वहीं, अगर वायरल तस्वीर के साथ किए जा रहे दावे गलत पाए जाते हैं, तो स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्थिति स्पष्ट करना भी जरूरी होगा, ताकि सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीर को लेकर लोगों में किसी तरह का भ्रम न रहे। फिलहाल मामले की वास्तविकता जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

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