झारखंड और दिल्ली के छात्र आंदोलनों पर हंगामा, प्रियंका गांधी ने कसा तंज
झारखंड में JPSC-JSSC अभ्यर्थियों पर लाठीचार्ज और दिल्ली छात्र प्रदर्शन को लेकर संसद के बाहर NDA और विपक्षी सांसदों ने प्रदर्शन किया। प्रियंका गांधी ने भाजपा सांसदों के विरोध पर तंज कसा।

Jharkhand Student Protest : संसद के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को राजनीतिक सरगर्मी तब चरम पर पहुंच गई, जब संसद परिसर के बाहर सत्ता पक्ष (NDA) और विपक्ष (INDIA गठबंधन) के सांसद आमने-सामने आ गए। दोनों पक्षों के दिग्गज नेता हाथों में तख्तियां लिए एक-दूसरे के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते नजर आए, जिससे परिसर का माहौल पूरी तरह से गरमा गया।
झारखंड लाठीचार्ज बनाम दिल्ली छात्र प्रदर्शन
संसद के बाहर यह टकराव दो अलग-अलग छात्र आंदोलनों को लेकर था। एक तरफ NDA के सांसद-जिनमें कंगना रनौत, अरुण गोविल, अपराजिता सारंगी और अनुराग ठाकुर जैसे दिग्गज शामिल थे-झारखंड में JPSC-JSSC अभ्यर्थियों पर हुए लाठीचार्ज का विरोध कर रहे थे। उनका सवाल था कि अपनी गठबंधन सरकार वाले राज्य झारखंड में छात्रों पर हुई इस बर्बरता पर राहुल गांधी चुप क्यों हैं? वे राहुल गांधी से माफी की मांग कर रहे थे।
वहीं दूसरी ओर, INDIA गठबंधन की ओर से प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव और जया बच्चन समेत अन्य नेताओं ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा। विपक्षी नेता गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे और जवाब की मांग पर अड़े हुए थे।
भाजपा सांसद के सवाल पर प्रियंका का जवाब
इस हंगामे के बीच जब प्रियंका गांधी मंगलवार सुबह संसद पहुंचीं, तो वहां NDA सांसद तख्तियां लेकर खड़े थे। एक भाजपा सांसद ने जोर-जोर से नारेबाजी करते हुए प्रियंका गांधी से पूछा कि राहुल गांधी झारखंड क्यों नहीं गए? इस पर प्रियंका गांधी रुकीं, मुस्कुराते हुए तख्ती को ध्यान से पढ़ा और जवाब देते हुए कहा, 'राहुल जी तो झारखंड के छात्रों से मिल भी चुके हैं।' इतना कहकर वह आगे बढ़ गईं।
'पहली बार सरकार के सांसदों को प्रदर्शन करते देखा'
इसके कुछ ही देर बाद पत्रकारों से मुखातिब होते हुए प्रियंका गांधी ने सत्ता पक्ष के इस विरोध प्रदर्शन पर जमकर तंज कसा। उन्होंने कहा, 'यह पहली बार देखा है कि सरकार के सांसद ही प्रदर्शन कर रहे हैं। कम से कम हमने उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर तो किया। अब आएं (अमित शाह) और बयान दें।' इस पूरे घटनाक्रम ने संसद के अंदर और बाहर दोनों जगह राजनीतिक पारे को काफी बढ़ा दिया है।
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