इंतजार खत्म ! झारखंड के 7 लाख अवैध मकान होंगे वैध, पोर्टल हुआ लॉन्च
सरकार ने राज्य भर में बिना स्वीकृति या नक्शा से अलग बनाये गये भवनों को राहत देने के लिए “झारखंड अनाधिकृत निर्मित भवन नियमितीकरण नियमावली, 2026” लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी है.

Ranchi / Jharkhand (Report By- Navin Sharma): झारखंड में अवैध तरीके से बने मकानों को सरकार ने वैध करने की कयावद तेज कर दी है. बता दें, धुर्वा के प्रोजेक्ट भवन स्थित सभागार में आज सरकार ने भवन नियमितीकरण नियमावली-2026 के तहत निमित ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च किया. इसके साथ ही अब झारखंड के शहरों में बने लगभग 7 लाख अनधिकृत मकान नियमितीकरण होंगे. पढ़ें ये खास रिपोर्ट...
झारखंड सरकार ने राज्य भर में बिना स्वीकृति या नक्शा से अलग बनाये गये भवनों को राहत देने के लिए “झारखंड अनाधिकृत निर्मित भवन नियमितीकरण नियमावली, 2026” लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी है. नगर विकास एवं आवास विभाग की ओर से जारी इस नियमावली के तहत 31 दिसंबर 2024 तक निर्मित ऐसे भवनों को निर्धारित शुल्क जमा कर नियमित कराया जा सकेगा. नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री सुदिव्य सोनू ने आज प्रोजेक्ट भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में वाकायदा एक पोर्टल का लॉन्च किया. और अपने संबोधन में सरकार के विजन को रखा.
मौके पर नगर विकास मंत्री ने कहा कि राज्य के लोगों के लिए आज ऐतिहासिक क्षण है. आज का समय बड़े कठिन प्रयास के बाद आया है, कई सुझाव भी आए. बहुत प्रयास के बाद विभाग ने अनियमित भवनों के नियमितीकरण के प्रयास को धरातल पर उतरा है. उन्होंने आगे कहा कि इसके लिए पोर्टल तैयार किया गया है, जिसमें राज्य के 7 लाख लोगों को नियमितीकरण का अवसर दिया गया है. पिछले 25 - 26 वर्षों में कई प्रयास हुए पर जनता की तरफ से रिस्पॉन्स की सीमा सीमित थी. अब यह एक मौका है, जिससे अपने भवनों का नियमितीकरण करवा सकते हैं. सीएम हेमंत सोरेन की इच्छा शक्ति है कि भवनों के नियमितिकरण की बेहतर प्रक्रिया हो, अब जनता का सहयोग और समर्थन नहीं मिलेगा तो शायद इसकी पुनरावृत्ति नहीं होगी. सरकार ने एक लिबरल पॉलिसी लाया है.
सरकार का कहना है कि इस नियमावली से लंबे समय से लंबित अवैध निर्माण मामलों का समाधान होगा, राजस्व में वृद्धि होगी और भवन स्वामियों को कानूनी राहत मिलेगी। साथ ही सार्वजनिक सुरक्षा और शहरी नियोजन मानकों को भी सुनिश्चित किया जाएगा. मौके उपस्थित नगर विकास एंव आवास विभाग के सचिव सुनील कुमार ने कहा कि भवनों की नियमितीकरण नियमावली कैबिनेट से स्वीकृत है. किसी कारणवश अपने मकान का नक्शा अगर पास नहीं कराया है तो उनके लिए यह अवसर है. जी+2 और 300 स्क्वायर फीट के भूखण्ड पर बने आवासों का नियमितीकरण किया जाना है. पहले भी कई स्कीम नियमितीकरण के लिए लाया गया था पर किसी कारण वश सफल नहीं हो पाया. झारखंड सरकार नगरीय क्षेत्र में संजीदगी के साथ काम कर रही है. ताकि शहरों की सूरत को बदला जाए. रांची में अभी तीन फ्लाईओवर का निर्माण कार्य होना है, जिसकी टेंडर प्रक्रिया में है. 15 वे वित्त आयोग की जितनी राशि मिलनी चाहिए थी नहीं मिल पाईं है, उसके लिए प्रयास जारी है.
झारखंड चैंबर ऑफ़ कॉमर्स लगातार सरकार के साथ डायलॉग करने की कोशिश कर रहा था. अनधिकृत तौर पर बने मकानों को नियमित करने का प्रयास किया जा रहा था. झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष आदित्य मल्होत्रा ने इसके लिए सरकार की सराहना की.
किन क्षेत्रों में लागू होगी नियमावली
यह नियमावली राज्य की सभी नगरपालिकाओं, क्षेत्रीय विकास प्राधिकरणों और झारखंड औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (JIADA) के अधीन आने वाले क्षेत्रों में लागू होगी.
क्या है अनाधिकृत निर्माण
ऐसे भवन या भवन का हिस्सा, जिसका निर्माण स्वीकृत नक्शा के विपरीत किया गया हो या बिना सक्षम प्राधिकार की अनुमति के बनाया गया हो, उसे अनाधिकृत निर्माण माना जाएगा.
नियमितीकरण शुल्क
नियमावली के अनुसार न्यूनतम शुल्क 10,000 रुपये होगा.
आवासीय भवनों के लिए अधिकतम 20,000 रुपये तक शुल्क निर्धारित किया गया है.
गैर-आवासीय भवनों के लिए शुल्क अधिक हो सकता है.
निम्न प्रकार के निर्माण नियमित नहीं किए जाएंगे
सरकारी भूमि या सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर अतिक्रमण
सड़क, नाली या जल निकासी क्षेत्र पर निर्माण
पार्किंग के लिए निर्धारित क्षेत्र का अतिक्रमण
मास्टर प्लान के विपरीत निर्माण
पर्यावरणीय मानकों का उल्लंघन
भवन उपविधि 2016 के नियमों के विपरीत
आवेदन प्रक्रिया
भवन मालिक केवल सक्षम प्राधिकारी द्वारा अधिकृत तकनीकी पेशेवर के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आवेदन की जांच के बाद प्राधिकारी नियमितीकरण की स्वीकृति देगा या अस्वीकृत करेगा.
अस्वीकृति पर अपील
यदि आवेदन अस्वीकृत होता है, तो आवेदक निर्धारित समय सीमा के भीतर अपीलीय प्राधिकरण के समक्ष अपील कर सकेगा.
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