JPSC के सफल अभ्यर्थियों की बढ़ी धड़कनें!, हाईकोर्ट की खंडपीठ में 3 हफ्ते बाद होगी अगली सुनवाई, जानें क्या है पूरा मामला
JPSC 11वीं से 13वीं मुख्य परीक्षा परिणाम रद्द करने की मांग पर झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। खंडपीठ ने 342 सफल अभ्यर्थियों से जवाब मांगा है। अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद होगी।

JPSC-JSSC Protest: झारखंड में JPSC (झारखंड लोक सेवा आयोग) से जुड़े विवाद थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। अब 11वीं से 13वीं संयुक्त JPSC मुख्य (मेंस) परीक्षा के परिणाम को रद्द करने की मांग से जुड़ा मामला एक बार फिर झारखंड हाईकोर्ट की शरण में पहुंच गया है। बुधवार को हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ में अयूब तिर्की एवं अन्य द्वारा दायर अपील (LPA) पर अहम सुनवाई हुई।
342 सफल अभ्यर्थियों को देना होगा जवाब
यह अपील हाईकोर्ट की एकल पीठ (सिंगल बेंच) के उस आदेश को चुनौती देते हुए दायर की गई है, जिसमें परीक्षा परिणाम रद्द करने की रिट याचिका को खारिज कर दिया गया था। बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने अनुशंसित और नियुक्त हो चुके 342 अभ्यर्थियों को इस मामले में अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इस केस के अंतिम निर्णय से सफल अभ्यर्थी सीधे तौर पर प्रभावित होंगे। मामले की अगली सुनवाई अब 3 सप्ताह बाद होगी। प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता कुमार हर्ष ने, जबकि JPSC की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरवाल ने पक्ष रखा।
क्या है याचिकाकर्ताओं का आरोप?
याचिकाकर्ताओं (अयूब तिर्की और राजेश कुमार) का मुख्य आरोप है कि JPSC ने मुख्य परीक्षा में डिजिटल इवैल्यूएशन (कॉपी जांचने की डिजिटल प्रक्रिया) कराया, जो परीक्षा नियमों के सख्त खिलाफ है। इसके अलावा, क्षेत्रीय भाषा (Regional Language) की कॉपियों की जांच ऐसे परीक्षकों से कराई गई जिनके पास कम अनुभव था, जबकि नियम के मुताबिक इसके लिए कम से कम 10 साल का अनुभव होना अनिवार्य था।
JPSC की दलील- 'फेल हुए तो उठा रहे सवाल'
JPSC की ओर से पेश हुए अधिवक्ता संजय पिपरवाल ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका तर्क है कि याचिकाकर्ता परीक्षा में असफल हो गए हैं, सिर्फ इसलिए अब वे पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं। अगर उन्हें परीक्षा की पद्धति से कोई भी आपत्ति थी, तो उन्हें परिणाम आने से पहले ही अपनी आपत्ति दर्ज करानी चाहिए थी। JPSC ने दावा किया कि सभी उम्मीदवारों के लिए एक समान नियम लागू किए गए थे और किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं हुआ है।
सिंगल बेंच ने अक्टूबर 2025 में खारिज की थी याचिका
बता दें कि इससे पहले अक्टूबर 2025 में जस्टिस दीपक रोशन की एकलपीठ (सिंगल बेंच) ने इस मामले की सुनवाई की थी। एकलपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद रिट याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि याचिकाकर्ता की आपत्तियां समयबद्ध नहीं थीं और मूल्यांकन प्रक्रिया में ऐसा कुछ भी गलत नहीं पाया गया, जिसके आधार पर परीक्षा परिणाम को रद्द किया जाए। अब देखना यह है कि खंडपीठ में सफल अभ्यर्थियों के जवाब के बाद यह मामला क्या नया मोड़ लेता है।
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