महिला विधेयक की आड़ में परिसीमन का खेल खेलने वाली भाजपा सरकार का फूट चुका है भांडा:कांग्रेस
रांची: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा कि केन्द्र सरकार महिला आरक्षण के नाम पर 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन करना चाहती थी। सरकार चाहती थी कि महिला आरक्षण के नाम पर विपक्ष इस बिल को पारित कर दे।

ताकि इसकी आड़ में 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन कर सके। सरकार द्वारा जो साजिश रची गयी। उसका उद्देश्य महिलाओं को आरक्षण देना नहीं।बल्कि सत्ता हासिल करना था।
दरअसल झारखण्ड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव, ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पाण्डेंय सिंह और प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष रमा खलखो ने कांग्रेस भवन रॉंची में संवाददाता सम्मेलन में ये बातें कही।वहीं संवाददाता सम्मेलन में मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा, मीडिया चेयरमैन सतीश पॉल मुंजनी, कार्यालय प्रभारी अभिलाष साहू,सह-कार्यालय प्रभारी राजन वर्मा शामिल थे।
महतो ने कहा कि भाजपा खुद को महिलाओं का मसीहा साबित करना चाहती है। उनकी सोच यह थी कि अगर बिल पारित नहीं हुआ। तो विपक्ष को महिला विरोधी बताकर परिसीमन के जरिए राजनैतिक लाभ उठा लेंगे। उन्होंने कहा कि अगर महिलाओं को आरक्षण देने के मुद्दे पर केन्द्र की सरकार गंभीर है। तो 2023 में सर्वसम्मति से पारित 543 में 33 प्रतिशत महिलाओं को आरक्षण देने के लिए सरकार 2029 के आम चुनाव में कदम बढ़ाये, विपक्ष समर्थन देने के लिए पूरी तरह तैयार है। मोदी-शाह की जोड़ी ने देश की आधी आबादी को ढाल बनाकर परिसीमन करने की कोशिश की और इस देश के लोकतंत्र, संविधान और संघवाद को चोट पहुंचाने का एक घृणित प्रयास किया। मोदी-शाह अपनी राजनीति को चमकाने के लिए भारत के लोकतंत्र को तबाह करने चले थे और उनकी यह साजिश गिर गयी।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस लगातार यह मांग कर रही है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 जो लोकसभा में भारी बहुमत से पारित हुआ था। उसे परिसीमन से क्यों जोड़ा गया। इससे यह साफ पता चलता है कि महिला आरक्षण बिल प्रधानमंत्री की नीयत में नहीं। बल्कि चुनावी एजेन्डा था।
कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने कहा कि वर्ष 2023 में लोकसभा से सर्वसम्मति से महिला आरक्षण विधेयक पारित हुआ था। तब इस विधेयक की क्या जरूरत थी। 2023 में विधेयक में स्पष्ट था कि पहले जनगणना,फिर परिसीमन और परिसीमन के आधार पर महिला आरक्षण होना था। एकाएक 16 अप्रैल को महिला आरक्षण विधेयक को लाना केन्द्र सरकार की गहरी राजनैतिक चाल परिसीमन का हिस्सा था। क्योंकि केन्द्र सरकार यह जानती है कि जब जनगणना होगा। तब देश को पता चला जायेगा कि जातियों की संख्या सामने आयेगी। एसटी, एससी, ओबीसी,अल्पसंख्यक का दबाव बढ़ेगा। तब उन्हें भी आरक्षण देना पड़ेगा। इसलिए केन्द्र सरकार ने उन महिलाओं एसटी, एससी, ओबीसी, अल्पसंख्यक के अधिकारों की कटौती और आरक्षण की कटौती के लिए इस विधेयक को आनन-फानन में लाया है।जिसे इण्डिया गठबंधन ने बेनकाब कर दिया।
ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पाण्डेंय सिंह ने कहा कि महिला विधेयक की चाशनी में केंद्र सरकार अपनी घटिया राजनीति को थोपने में पूरी तरह से नाकाम साबित हुई है। महिला विधेयक की आड़ में परिसीमन का खेल खेलनी वाली बीजेपी सरकार का भांडा फूट चुका है।जो अंक गणित केंद्र की सरकार ने अगले चुनाव के लिए परिसीमन के बहाने सेट किया था। उसको इंडिया गठबंधन ने डिकोड कर दिया है। यही वजह है कि पिछले 12 साल से केंद्र में शासन कर रही बीजेपी की अगुवाई वाली सरकार पहली बार लोकसभा में विधेयक गिर जाने से तिलमिलाई हुई है। वो बेचौन है। क्योंकि पहली बार उन्हें मुंह की खानी पड़ी है। देश की आबो हवा बदल रही है। राजनैतिक मौसम अब करवट लेने लगा है। देश के प्रधानमंत्री महिला आरक्षण और सम्मान के नाम पर अपने भविष्य को लेकर सत्ता में काबिज रहने काएक षडयंत्र रचा था। जो पूरी रह धराशाही हो चुका है। भाजपा की मंशा कहीं से भी महिलाओं को आरक्षण देने की नहीं है। अगर ऐसा होता तो साल 2023 में लोकसभा से सर्वसम्मति से पारित महिला आरक्षण विधेयक के आधार पर साल 2024 का चुनाव होना चाहिए था। तब महिलाओं को आरक्षण का लाभ मिल पाता।लेकिन ऐसा नहीं हुआ। दरअसल बीजेपी ने हमेशा से महिलाओं को ठगने, मुद्दों से भटकाने और उनकी हकमारी करने का काम किया है।
प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष रमा खलखो ने कहा कि इस मुद्दे पर राज्य भर में महिलाओं के द्वारा केन्द्र सरकार के राजनैतिक साजिश को बेनकाब किया जायेगा। हर एक जिले में महिला कांग्रेस कार्यक्रम आयोजित कर इण्डिया गठबंधन की सोच और सत्ता में बैठे लोगों के षडयंत्र का पर्दाफाश करेगी।
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