1800 सफाईकर्मी, करोड़ों का सवाल और सिर्फ ₹1000-1500 भुगतान! सुपौल में बवाल
सुपौल में सरकारी स्कूलों की हाउसकीपिंग व्यवस्था को लेकर जन सुराज ने गंभीर आरोप लगाए हैं। 1800 से अधिक सफाईकर्मियों को सिर्फ 1000-1500 रुपये भुगतान और तीन वर्षों में 55 करोड़ की कथित अनियमितता का दावा किया गया है।


सुपौल: सरकारी स्कूलों में सफाई व्यवस्था को लेकर सुपौल में अब सियासत गरमा गई है। जन सुराज के जिलाध्यक्ष अनिल कुमार सिंह ने हाउसकीपिंग योजना के तहत काम कर रहे सफाईकर्मियों के भुगतान और सुविधाओं को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि जिले के 1800 से अधिक सफाईकर्मियों को श्रम कानून के तहत मिलने वाले मानदेय और दूसरी वैधानिक सुविधाओं का लाभ नहीं दिया जा रहा है। अनिल कुमार सिंह के मुताबिक, कई सफाईकर्मियों को कथित तौर पर सिर्फ 1000 से 1500 रुपये प्रति माह दिए जा रहे हैं, जबकि संविदा में ईपीएफ, ईएसआई, यूएएन, बीमा समेत कई सुविधाओं का प्रावधान बताया गया है।
तीन साल में 55 करोड़ की अनियमितता का आरोप
जन सुराज जिलाध्यक्ष ने दावा किया कि पिछले तीन वर्षों में मजदूरी के नाम पर करीब 55 करोड़ रुपये की अनियमितता हुई है। उनका आरोप है कि योजना के तहत एजेंसी को सिर्फ सफाई ही नहीं, बल्कि प्लंबिंग, सफाई सामग्री, ड्रेस, आईकार्ड और बायोमेट्रिक उपस्थिति जैसी व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित करनी हैं। लेकिन उनके मुताबिक, इन शर्तों का स्कूलों में पूरी तरह पालन नहीं हो रहा है। हालांकि, 55 करोड़ रुपये की कथित अनियमितता के आरोप की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
पहले भी एजेंसियों पर लगा था जुर्माना
अनिल कुमार सिंह का कहना है कि पूर्व में स्कूलों में गंदगी मिलने के बाद संबंधित एजेंसी को शोकॉज किया गया था। उनके अनुसार, तीनों एजेंसियों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था।
आरोप है कि मामले की जांच के लिए कमेटियां भी बनाई गईं, लेकिन कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। मामला तब और गंभीर हो गया है जब एजेंसी का मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने के बीच उसी एजेंसी को दोबारा काम देने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं। जन सुराज जिलाध्यक्ष का आरोप है कि विभिन्न प्रखंडों से भेजी गई अनुशंसा रिपोर्ट में सफाईकर्मियों को 1000 से 1500 रुपये भुगतान किए जाने की बात सामने आने के बावजूद इसे मानक के अनुरूप बताया गया है।
जांच के बाद सामने आएगी सच्चाई
मामले को लेकर शिक्षा पदाधिकारी संग्राम सिंह से फोन पर बात की गई। उन्होंने कहा कि यह जांच का विषय है और जांच के बाद सही रिपोर्ट सामने आएगी। फिलहाल शिक्षा विभाग या संबंधित एजेंसी की ओर से लगाए गए आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
(सुपौल से कुंदन कुमार की रिपोर्ट)

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