अशोक धाम में इस बार कुछ अलग होगा! सुरक्षा के इंतज़ाम का ख़ास प्लान
सावन में अशोक धाम पहुंचने वाली भारी भीड़ को देखते हुए लखीसराय जिला प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। अशोक धाम हॉल्ट से मंदिर परिसर तक CCTV, पुलिस बल और ड्रोन कैमरे से निगरानी की जाएगी।


लखीसराय: अशोक धाम में इस बार श्रद्धालुओं को सुरक्षा व्यवस्था का अलग ही इंतजाम देखने को मिलेगा। सावन की सोमवारी पर उमड़ने वाली भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन ने अशोक धाम होल्ट से लेकर मंदिर परिसर तक सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की विशेष तैयारी की है।
यह तैयारी खास तौर पर 17 अगस्त को सावन की तीसरी सोमवारी पर हुई दर्दनाक भगदड़ के बाद और महत्वपूर्ण हो गई है। उस हादसे में सात श्रद्धालुओं की मौत हुई थी और कई लोग घायल हुए थे। शुरुआती जानकारी में अचानक बढ़ी भीड़, बैरिकेडिंग टूटने और बिजली के तार से जुड़ी अफवाह के बाद मची अफरा-तफरी को हादसे से जोड़ा गया था।
अब होल्ट से मंदिर तक प्रशासन की नजर
अशोक धाम में इस बार भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। इसे देखते हुए प्रशासन ने अशोक धाम होल्ट, मंदिर तक जाने वाले रास्ते और मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की तैयारी की है। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अलग-अलग स्थानों पर पुलिस बल और सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की जाएगी। संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी ताकि भीड़ का दबाव एक जगह जमा न हो।
सुरक्षा व्यवस्था में इस बार तकनीक का भी ज्यादा इस्तेमाल किया जाएगा। महत्वपूर्ण स्थानों पर CCTV कैमरे लगाए जा रहे हैं, जबकि भीड़ की निगरानी के लिए ड्रोन कैमरे का इस्तेमाल किए जाने की तैयारी है। प्रशासन की कोशिश है कि किसी भी हिस्से में भीड़ अचानक बढ़ने या भगदड़ जैसी स्थिति बनने से पहले ही उसे नियंत्रित किया जा सके।
पिछली घटना से लिया गया सबक
17 अगस्त की घटना में भारी भीड़ के बीच अचानक अफरा-तफरी मचने के बाद श्रद्धालुओं के बीच भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हुई थी। अधिकारियों के मुताबिक, उस सुबह दो ट्रेनों के रुकने के बाद मंदिर की ओर श्रद्धालुओं की संख्या अचानक बढ़ गई थी और भीड़ के दबाव में बैरिकेडिंग टूट गई। इस घटना के बाद सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को लेकर प्रशासन पर सवाल भी उठे थे। ऐसे में इस बार की तैयारियों में क्राउड कंट्रोल, निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया पर खास जोर दिया जा रहा है।
प्रशासन ने पुलिसकर्मियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि भीड़ में किसी भी तरह की अव्यवस्था, धक्का-मुक्की या संदिग्ध स्थिति दिखाई देने पर तुरंत हस्तक्षेप किया जाए।सिर्फ मंदिर परिसर ही नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं के आने-जाने वाले रास्तों पर भी निगरानी रखने की तैयारी है। कोशिश यही है कि श्रद्धालु कतारबद्ध तरीके से आगे बढ़ें और किसी एक स्थान पर अत्यधिक भीड़ जमा न हो।
पिछली घटना में सात लोगों की जान जाने के बाद अब हर व्यवस्था को लेकर सतर्कता जरूरी है। इसलिए इस बार होल्ट से मंदिर तक प्रशासन की मौजूदगी और निगरानी पहले से कहीं ज्यादा दिखाई देने की उम्मीद है। अब असली परीक्षा यही होगी कि तैयारियां जमीन पर कितनी प्रभावी साबित होती हैं और भारी भीड़ के बीच प्रशासन बिना किसी अप्रिय घटना के श्रद्धालुओं की आवाजाही सुनिश्चित कर पाता है या नहीं।

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