नगर निगम की दूसरी बैठक सम्पन्न, गिरिडीह श्मशान घाट मुखाग्नि देने की राशि तय करने पर नहीं बनी सहमति, मंत्री और मेयर हुए शामिल
गिरिडीह में मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू की अध्यक्षता में आज नगर निगम बोर्ड की बैठक हुई जिसमें कई अहम विषयों पर चर्चा की गई.

Giridih / Jharkhand (Report By- Manoj Kumar Pintu): गिरिडीह नगर निगम के बोर्ड का दूसरा बैठक सोमवार को नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के अध्यक्षता में आयोजित हुई. इस दौरान बैठक में मेयर प्रमिला मेहरा, राज्यसभा सांसद सरफराज अहमद, डिप्टी मेयर, उप नगर आयुक्त प्रशांत लायक, सहायक नगर आयुक्त अशोक हांसदा, अर्बन प्लानर मंजूर आलम भी शामिल हुए.
बैठक में सहमति बनी कि नगर निगम के हर वार्ड को फिलहाल 40 लाख की राशि आवंटित किया जाएगा. और वार्ड पार्षदो के अनुमोदन पर वार्ड में विकास कार्य शुरू होंगे. जरूरत के अनुसार वार्डो में पीसीसी, रोड निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा. बैठक में वार्ड पार्षद रंजीत और समरदीप ने कहा कि विकास कार्य जो होंगे, उसमें वार्ड पार्षद के कोई भी दोस्त रिश्तेदार और ऐसे व्यक्ति को सड़क और पीसीसी निर्माण के कार्य से दूर रखते हुए, टेंडर में ऐसे लोगों को शामिल कराया जाए. जिन्हें कार्य कराने का अनुभव हो और पेशे से ठेकेदार हो... न कि निगम ऐसे व्यक्ति को ठेकेदार जबरन बना दे, जो किसी वार्ड पार्षद का दोस्त या रिश्तेदार.

मौके पर मेयर प्रमिला ने नगर निगम के राजस्व को बढ़ाने को लेकर चर्चा की. और मार्केट कॉम्प्लेक्स के निर्माण कराने का सुझाव दिया. लेकिन कोई निर्णय नहीं हो पाया. इस प्रस्ताव को तीसरे बैठक के लिए रखा गया. जबकि वार्ड पार्षद रंजीत यादव ने सुझाव देते हुए मांग किया कि शहर के मारवाड़ी श्मशान घाट में मुखाग्नि के लिए एक राशि तय होना बेहद जरूरी हैं. क्योंकि राशि तय नहीं होने के कारण अक्सर मुखाग्नि देने वाले डोम समाज के लोगों से शोकाकुल परिवार वालो के साथ विवाद होता है. नगर निगम बोर्ड की बैठक में इस बेहद जरूरी मुद्दे पर भी कोई निर्णय नहीं हुआ.

हालांकि इस दौरान चर्चा जरूर हुआ कि पहले कुछ शहरों से इसे जानकारी जुटाया जाएगा कि कितनी राशि निर्धारित है. चर्चा के दौरान वार्ड पार्षद रंजीत यादव ने इस दौरान कहा कि किसी दूसरे से तय राशि की जानकारी जुटाना से बेहतर रहेगा कि नगर निगम तय करें कि अब डोम समाज के लोग, जो देहांत के बाद पार्थिव शव को मुखाग्नि देने के लिए विवाद करते है, उस पर निगम 1100 से लेकर 3100 कि राशि तय कर दें. लेकिन कोई सहमति नहीं बन पाई.
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