भाई की कलाई नहीं, पेड़ को बांधी राखी! बिहारशरीफ में अनोखा रक्षाबंधन
बिहारशरीफ के कारगिल पार्क में रक्षाबंधन पर भाई की कलाई की जगह महोगनी के पौधे को राखी बांधी गई। पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेते हुए पौधे को विशाल वृक्ष बनने तक देखभाल करने का प्रण लिया गया।


बिहारशरीफ: रक्षाबंधन का त्योहार आमतौर पर भाई-बहन के प्रेम और एक-दूसरे की रक्षा के संकल्प से जुड़ा है। लेकिन बिहारशरीफ के कारगिल पार्कमें इस बार रक्षाबंधन पर पर्यावरण संरक्षण का अनोखा संदेश देखने को मिला। यहां महोगनी के पौधे को राखी बांधकर उसे विशाल वृक्ष बनने तक संरक्षण देने का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण को रक्षाबंधन की भावना से जोड़ते हुए कहा गया कि जिस तरह बहन अपने भाई की रक्षा की कामना करती है, उसी तरह समाज को पेड़-पौधों की रक्षा का संकल्प लेना चाहिए।
‘एक पेड़, एक जिंदगी’ का दिया संदेश
इस मौके पर मंत्री श्रवण कुमार ने पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च कर्तव्य बताते हुए हरियाली को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने कहा कि पर्यावरण ही जीवन का आधार है और एक पेड़ एक जिंदगी के समान है। पेड़ हमें ऑक्सीजन और छाया देने के साथ पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उन्हें बड़ा होने तक सुरक्षित रखना भी जरूरी है।
पौधे को परिवार के सदस्य की तरह पालने की अपील
कार्यक्रम में लोगों से अपील की गई कि जन्मदिन, विवाह, माता-पिता या बच्चों से जुड़े विशेष अवसरों पर कम से कम एक पौधा जरूर लगाएं। साथ ही पौधारोपण के बाद उसकी नियमित देखभाल और सुरक्षा की जिम्मेदारी भी उठाएं वक्ताओं ने कहा कि रक्षाबंधन जैसे पर्व को प्रकृति से जोड़कर समाज में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना मजबूत की जा सकती है।
जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए जनभागीदारी जरूरी
कार्यक्रम में जलवायु परिवर्तन को दुनिया के सामने बड़ी चुनौती बताते हुए हरित बिहार की दिशा में जनभागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित और बेहतर भविष्य देने के लिए पर्यावरण संरक्षण को रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाना होगा।
इस दौरान प्लास्टिक मुक्त, नशा मुक्त और पेड़ युक्त बिहार का संदेश भी दिया गया। कार्यक्रम का संदेश साफ रहा-“जल है तो जीवन है, हरियाली है तो खुशहाली है।”

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