पुनपुन नदी पर बराज की मांग को लेकर किसानों का बड़ा आंदोलन, अनिश्चितकालीन धरना शुरू
पुनपुन नदी में बराज निर्माण की मांग को लेकर किसान संघर्ष समिति ने 27 अगस्त से अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया है। किसानों का दावा है कि बराज बनने से अरवल, जहानाबाद और पटना के बड़े इलाके को सिंचाई सुविधा मिल सकती है।


अरवल/जहानाबाद: पुनपुन नदी में बराज निर्माण की मांग को लेकर किसान संघर्ष समिति के बैनर तले किसानों और मजदूरों ने गुरुवार, 27 अगस्त 2026 से अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया है। आंदोलनकारियों ने पंतीत वियर को बराज में तब्दील करने की मांग उठाई है। किसानों का दावा है कि बराज बनने से अरवल, जहानाबाद और पटना के बड़े भूभाग में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हो सकती है।
पानी बहकर गंगा में चला जाता है, किसान परेशान
किसानों का कहना है कि पुनपुन नदी में पर्याप्त पानी रहने के बावजूद उसका अधिकांश हिस्सा बहकर गंगा में चला जाता है। दूसरी ओर, सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण किसानों को खेतों की सिंचाई के लिए निजी बोरिंग और डीजल पंप पर निर्भर रहना पड़ता है।
इससे किसानों की खेती की लागत बढ़ रही है। आंदोलनकारियों के मुताबिक, महंगी सिंचाई व्यवस्था का असर फसल उत्पादन और किसानों की आय पर भी पड़ रहा है।
पंतीत वियर को बराज में बदलने की मांग
धरना दे रहे किसानों की प्रमुख मांग है कि पंतीत वियर को बराज में परिवर्तित किया जाए, ताकि नदी के पानी का बेहतर तरीके से इस्तेमाल सिंचाई के लिए किया जा सके।
किसानों का दावा है कि बराज बनने से केवल एक क्षेत्र नहीं, बल्कि अरवल, जहानाबाद और पटना जिले के बड़े हिस्से को सिंचाई सुविधा मिल सकती है। इससे बड़ी संख्या में किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
मांग पूरी होने तक जारी रहेगा आंदोलन
किसान संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया है कि बराज निर्माण को लेकर ठोस पहल होने तक उनका अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा। किसानों और मजदूरों ने सरकार से इस मांग पर गंभीरता से विचार करने और सिंचाई समस्या का स्थायी समाधान निकालने की अपील की है।
अब देखना होगा कि किसानों के इस आंदोलन पर प्रशासन और सरकार की ओर से क्या पहल की जाती है और पुनपुन नदी में बराज निर्माण की मांग को लेकर आगे क्या निर्णय लिया जाता है।
(अरवल से निशांत मिश्र की रिपोर्ट)

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