छात्र आंदोलन के बीच CDPO परीक्षा में भी उठे धांधली के सवाल, केंद्रीय मंत्री संजय सेठ बोले- युवाओं पर FIR पूरी तरह गलत
झारखंड में छात्र आंदोलन के बीच CDPO परीक्षा में कथित धांधली के आरोप सामने आए हैं। केंद्रीय मंत्री संजय सेठ ने करीब 600 युवाओं पर FIR को गलत बताते हुए परीक्षा में पारदर्शिता और जांच की मांग की।

Jharkhand Student Protest : झारखंड में चल रहे छात्र आंदोलन के बीच रांची के सांसद और केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए राज्य सरकार पर करारा हमला बोलते हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे करीब 600 युवाओं के खिलाफ FIR दर्ज किए जाने पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। संजय सेठ ने कहा कि अपने हक और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता मांगने वाले युवाओं पर इस तरह मुकदमे लादना पूरी तरह से गलत है।
"न उपद्रव हुआ, न पत्थरबाजी... तो FIR का क्या औचित्य?"
केंद्रीय मंत्री संजय सेठ ने कहा कि राज्य के युवा अपने अधिकारों और परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग को लेकर बिल्कुल शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर उनके खिलाफ FIR दर्ज करने का क्या औचित्य है। उन्होंने पूछा कि अपनी आवाज उठाने वाले इन निर्दोष युवाओं का आखिर अपराध क्या था? उन्होंने ध्यान दिलाया कि प्रदर्शन के दौरान न तो कोई उपद्रव हुआ था और न ही कहीं से पत्थरबाजी की कोई घटना सामने आई थी। इसके बावजूद पुलिस ने युवाओं पर मुकदमे दर्ज कर दिए। संजय सेठ ने यह भी याद दिलाया कि विधानसभा मार्च को देखते हुए पूरे रांची में पहले से ही बड़े पैमाने पर बैरिकेडिंग की गई थी और CM आवास के आसपास भी तमाम रास्तों को बैरिकेड लगाकर बंद कर दिया गया था।
CDPO परीक्षा में भी धांधली के आरोप, छात्रों ने मांगी जांच
एक तरफ जहां छात्रों पर हुई कार्रवाई को लेकर राजनीति गर्मा रही है, वहीं दूसरी तरफ CDPO परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर भी नए सवाल खड़े होने लगे हैं। प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया है कि CDPO परीक्षा में दूसरा स्थान हासिल करने वाले प्रमोद कुमार पाठक के तार UP के कथित सॉल्वर गिरोह से जुड़े हो सकते हैं। छात्रों ने उनके पुराने मामलों को लेकर भी कई सवाल उठाए हैं और इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। हालांकि, इन आरोपों की अभी तक कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन अभ्यर्थी लगातार निष्पक्ष जांच कराने पर अड़े हुए हैं।
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