भारत-दक्षिण कोरिया साझेदारी को मिलेगी नई गति, जयशंकर ने तकनीक से समुद्री सुरक्षा तक सहयोग बढ़ाने का दिया संदेश
भारत-दक्षिण कोरिया साझेदारी को मिलेगी नई गति, जयशंकर ने तकनीक से समुद्री सुरक्षा तक सहयोग बढ़ाने का दिया संदेश

भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने दक्षिण कोरिया में आयोजित जेजू फोरम फॉर पीस एंड प्रॉस्पेरिटी 2026 में कहा कि मौजूदा वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत और दक्षिण कोरिया मिलकर आर्थिक स्थिरता और क्षेत्रीय सुरक्षा को नई दिशा दे सकते हैं। उन्होंने दोनों देशों की साझेदारी को समय की आवश्यकता बताते हुए कहा कि कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां दोनों एक-दूसरे की ताकत बन सकते हैं।
अपने संबोधन में जयशंकर ने कहा कि भारत और दक्षिण कोरिया के बीच सहयोग केवल पारंपरिक व्यापार तक सीमित नहीं रहना चाहिए। जहाज निर्माण, सेमीकंडक्टर, उन्नत विनिर्माण, डिजिटल प्रौद्योगिकी और नवाचार जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम करने से दोनों देशों को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा। उन्होंने "शिप्स से चिप्स तक" सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया।
विदेश मंत्री ने कहा कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक सुरक्षित, भरोसेमंद और विविध बनाना आज की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है। ऐसे में भारत और दक्षिण कोरिया मिलकर मजबूत सप्लाई चेन तैयार कर सकते हैं, जिससे वैश्विक व्यापार को भी मजबूती मिलेगी।
जयशंकर ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को भी अहम मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि खुले, सुरक्षित और नियम-आधारित समुद्री मार्ग अंतरराष्ट्रीय व्यापार और आर्थिक विकास के लिए बेहद जरूरी हैं। इसलिए दोनों देशों को इस दिशा में रणनीतिक सहयोग और बढ़ाना चाहिए।
उन्होंने अपने संबोधन में पांच प्रमुख क्षेत्रों—आपूर्ति श्रृंखला, उच्च प्रौद्योगिकी, समुद्री सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और वैश्विक स्थिरता—में साझेदारी को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। उनके अनुसार, इन क्षेत्रों में संयुक्त प्रयास न केवल भारत और दक्षिण कोरिया के संबंधों को मजबूत करेंगे, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी अधिक स्थिर और संतुलित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
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