MACT रांची का अहम फैसला: बीमा कंपनी के दावों पर सवाल, ₹45.58 लाख मुआवजे का आदेश
रांची के पीठासीन अधिकारी निशांत कुमार की अदालत ने मोटर एक्सीडेंट क्लेम केस संख्या 226/2024 में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। मामले में वाहन मालिक की ओर से अधिवक्ता शिवम लाथ ने पैरवी की।

Jharkhand Ranchi... news... मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (MACT), रांची के पीठासीन अधिकारी निशांत कुमार की अदालत ने मोटर एक्सीडेंट क्लेम केस संख्या 226/2024 में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। मामले में वाहन मालिक की ओर से अधिवक्ता शिवम लाथ ने पैरवी की। अदालत ने बीमा कंपनी की ओर से उठाए गए ‘हायर एंड रिवार्ड’ तथा ‘ड्राइवर स्वैपिंग’ से जुड़े दावों को स्वीकार नहीं किया और कुल ₹45,58,000 के मुआवजे का भुगतान रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी को करने का निर्देश दिया। बीमा कंपनी ने उठाए थे दो प्रमुख सवाल सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी की ओर से दावा किया गया था कि दुर्घटना के समय निजी वाहन का इस्तेमाल किराए या व्यावसायिक उद्देश्य के लिए किया जा रहा था। इसे पॉलिसी की ‘Limitations as to Use’ शर्त का उल्लंघन बताया गया। इसके अलावा बीमा कंपनी ने वाहन चलाने वाले व्यक्ति को लेकर ‘ड्राइवर स्वैपिंग’ का आरोप भी उठाया। कंपनी का तर्क था कि दुर्घटना के वास्तविक चालक को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। जांच रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर उठे सवाल बीमा कंपनी ने अपने दावों के समर्थन में ‘ईगल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी’ की जांच रिपोर्ट को साक्ष्य के रूप में पेश किया था। अधिवक्ता शिवम लाथ ने जिरह के दौरान रिपोर्ट की प्रमाणिकता और उसे पेश करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। मामले में यह बात सामने आई कि प्रस्तुत जांच रिपोर्ट फोटोकॉपी के रूप में थी। बीमा कंपनी के गवाह OPW-2, जो सीनियर लीगल मैनेजर थे, जिरह के दौरान रिपोर्ट तैयार करने वाले जांचकर्ता का नाम स्पष्ट रूप से नहीं बता सके। रिपोर्ट तथा कथित बयान पर जांचकर्ता के हस्ताक्षर और बयान दर्ज किए जाने की तारीख को लेकर भी सवाल उठे। जिरह के दौरान कथित बयान की तैयारी को लेकर भी ऐसी बातें सामने आईं, जिनसे उसकी प्रमाणिकता पर प्रश्न खड़े हुए। वाहन मालिक से जिरह में भी नहीं आया सीधा सवाल मामले में वाहन मालकिन OPW-1 की गवाही के दौरान उन्होंने दुर्घटना के समय अजीत कुमार तिवारी के वाहन चलाने की बात कही और वाहन से संबंधित कागजात को वैध बताया। समाचार में उपलब्ध मामले के विवरण के अनुसार, बीमा कंपनी की ओर से वाहन मालकिन से जिरह के दौरान कथित कमर्शियल उपयोग अथवा ड्राइवर स्वैपिंग के आरोपों को लेकर कोई प्रभावी और सीधा सुझाव नहीं रखा गया। अदालत ने बीमा कंपनी के दावों को नहीं माना अदालत ने बीमा कंपनी की ओर से पेश किए गए दस्तावेज और दलीलों का मूल्यांकन करने के बाद उसके दावों को पर्याप्त प्रमाण से सिद्ध नहीं माना। जांच रिपोर्ट (Ext. B) की स्वीकार्यता और प्रमाणिकता को लेकर उठी आपत्तियों को भी अदालत ने महत्व दिया। इसके बाद न्यायाधिकरण ने बीमा कंपनी की ओर से वाहन मालिक पर देनदारी डालने के तर्कों को स्वीकार नहीं किया और ₹45.58 लाख के मुआवजे का भुगतान बीमा कंपनी द्वारा किए जाने का आदेश दिया। यह फैसला इस बात को रेखांकित करता है कि मोटर दुर्घटना मामलों में बीमा कंपनी द्वारा पॉलिसी उल्लंघन का आरोप लगाए जाने पर उसे उचित और विश्वसनीय साक्ष्यों के माध्यम से साबित करना आवश्यक है।
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