रांची यूनिवर्सिटी और गॉसनर कॉलेज को हाईकोर्ट का झटका!, जानें मामला
झारखंड हाईकोर्ट ने गॉस्नर कॉलेज के सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. नवीन कुमार के अर्जित अवकाश भुगतान मामले में रांची यूनिवर्सिटी और कॉलेज के आदेश रद्द कर दिए। कोर्ट ने 10 सप्ताह में पुनर्गणना कर भुगतान का निर्देश दिया, देरी पर 7% ब्याज देना होगा।

Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट (High Court) ने गॉस्नर कॉलेज, रांची के एक सेवानिवृत्त प्रोफेसर के अर्जित अवकाश (Earned Leave) भुगतान मामले में एक बेहद अहम फैसला सुनाया है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने डॉ. नवीन कुमार के अर्जित अवकाश को शून्य मानकर दावा खारिज करने के रांची यूनिवर्सिटी (Ranchi University) और कॉलेज प्रबंधन के आदेश को पूरी तरह रद्द कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि कानून और नियमों के अनुसार उनके पूरे अर्जित अवकाश की दोबारा गणना कर 10 सप्ताह के भीतर भुगतान सुनिश्चित किया जाए। अदालत ने यह भी साफ कर दिया है कि यदि तय सीमा में भुगतान नहीं होता है, तो प्रबंधन को 7 प्रतिशत की दर से ब्याज भी देना होगा।
40 साल की सेवा के बाद मेडिकल लीव को बनाया था हथियार
डॉ. नवीन कुमार ने गॉस्नर कॉलेज में प्रोफेसर के पद पर करीब 40 वर्षों तक अपनी उत्कृष्ट सेवाएं दीं और 30 नवंबर 2018 को सेवानिवृत्त हुए। रिटायरमेंट के बाद उन्होंने अपने अर्जित अवकाश के बदले मिलने वाली राशि और ग्रेच्युटी के अंतर के भुगतान की मांग की थी। ग्रेच्युटी का भुगतान तो कर दिया गया, लेकिन कॉलेज प्रबंधन ने उनके अर्जित अवकाश के दावे को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि लंबी बीमारी के दौरान प्रोफेसर ने अपनी सभी छुट्टियां इस्तेमाल कर ली हैं। रांची यूनिवर्सिटी ने भी 7 मई 2025 को एक आदेश जारी कर कहा था कि उनके खाते में कोई अर्जित अवकाश शेष नहीं है। कॉलेज ने दावा किया था कि 140 दिनों की मेडिकल लीव के अलावा 66 दिन वे अनधिकृत रूप से अनुपस्थित थे, इसलिए 119 दिनों में से कटौती करने के बाद अवकाश शून्य हो जाता है। इसी मनमानी के खिलाफ प्रोफेसर ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
बिना विभागीय कार्रवाई के अनुपस्थिति अनधिकृत नहीं
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कॉलेज के तर्कों को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने पाया कि सेवा अवधि के दौरान कॉलेज ने कभी भी डॉ. नवीन कुमार की अनुपस्थिति को औपचारिक रूप से अनधिकृत (Unauthorized) घोषित नहीं किया। न ही इस आधार पर उनके खिलाफ कोई विभागीय जांच बैठाई गई और न ही कोई कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी किया गया। बीमारी के दौरान भी उन्हें लगातार वेतन मिलता रहा। अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि जब सेवाकाल में कोई आपत्ति नहीं जताई गई, तो सालों बाद रिटायरमेंट के समय उस अवधि को अनधिकृत बताकर अर्जित अवकाश के भुगतान से वंचित नहीं किया जा सकता है। यह UGC के नियमों के भी खिलाफ है।
गणना में मिली गड़बड़ी, 180 दिनों के अवकाश के हैं हकदार
हाईकोर्ट ने कॉलेज द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों में भी गंभीर विसंगतियां उजागर कीं। एक हलफनामे में कॉलेज ने अर्जित अवकाश 105 दिन बताया था, जबकि दूसरे दस्तावेज में इसे 119 दिन कर दिया गया। इसके अलावा, छुट्टियों में किए गए काम का कोई रिकॉर्ड भी कॉलेज के पास नहीं था, जो कि UGC दिशा-निर्देशों के अनुसार गणना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि 40 वर्षों की लंबी सेवा को देखते हुए नियम के अनुसार उनका अवकाश 480 दिनों तक बनता है। चूंकि रांची यूनिवर्सिटी 6 अगस्त 2021 से पहले सेवानिवृत्त होने वाले शिक्षकों को अधिकतम 180 दिनों का अर्जित अवकाश भुगतान कर रही है, इसलिए डॉ. नवीन कुमार भी कम से कम 180 दिनों के लाभ के हकदार हैं।
10 सप्ताह का अल्टीमेटम, वरना लगेगा 7% ब्याज
सभी साक्ष्यों और तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने रांची यूनिवर्सिटी के 7 मई 2025 और गॉस्नर कॉलेज के 11 अप्रैल 2025 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें प्रोफेसर का दावा खारिज किया गया था। अदालत ने 10 सप्ताह के भीतर अर्जित अवकाश की सही गणना कर पूरी राशि का भुगतान करने का कड़ा फरमान सुनाया है। साथ ही यह शर्त भी रखी है कि यदि तय 10 सप्ताह की मियाद के अंदर भुगतान नहीं किया गया, तो पात्रता की तारीख से लेकर वास्तविक भुगतान होने तक कुल राशि पर 7 प्रतिशत (7%) का ब्याज भी चुकाना होगा।
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