हाथ में गंगाजल, जुबान पर आरक्षण... मुकेश सहनी का बड़ा ऐलान, BJP के लिए क्यों बढ़ी टेंशन?
मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना में संकल्प यात्रा के दौरान VIP प्रमुख मुकेश सहनी ने निषाद-कश्यप समाज के आरक्षण को लेकर बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि 2027 से पहले मांग पूरी नहीं हुई तो समाज बीजेपी को वोट नहीं देगा।


मुजफ्फरनगर: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले निषाद-कश्यप आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर सियासी बहस के केंद्र में आता दिख रहा है। विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के संस्थापक और बिहार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ने मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना से साफ संदेश दिया है - आरक्षण नहीं मिला तो वोट भी नहीं मिलेगा।
गुरुवार, 20 अगस्त को बुढ़ाना विधानसभा क्षेत्र में आयोजित VIP की संकल्प यात्रा में सहनी ने निषाद और कश्यप समाज के लिए अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा और आरक्षण की मांग तेज करने का ऐलान किया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने हाथ में गंगाजल लेकर अपने अधिकारों और बच्चों के भविष्य के लिए संघर्ष का संकल्प भी लिया।
"2027 से पहले आरक्षण नहीं तो BJP को वोट नहीं"
मुकेश सहनी ने कहा कि यदि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले निषाद-कश्यप समाज की आरक्षण संबंधी मांग पूरी नहीं होती है तो समाज भाजपा को वोट नहीं देगा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में निषाद, कश्यप, बिंद और मल्लाह समाज की बड़ी आबादी है। यदि यह समाज अपने मुद्दों पर एकजुट होता है तो चुनावी राजनीति में बड़ी भूमिका निभा सकता है।
सहनी ने कहा, “हमारा नारा साफ है- आरक्षण नहीं तो वोट नहीं।” उन्होंने समाज से अपने वोट की राजनीतिक ताकत को समझने की अपील की। सहनी के मुताबिक, बुढ़ाना में लिया गया संकल्प सिर्फ एक सभा तक सीमित नहीं रहेगा। अगले 100 दिनों तक VIP के कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर अभियान चलाएंगे और लोगों को आरक्षण तथा संवैधानिक अधिकारों को लेकर जागरूक करेंगे। उन्होंने कहा कि इस यात्रा का उद्देश्य फिलहाल चंदा या वोट मांगना नहीं, बल्कि समाज को अपने अधिकारों के प्रति संगठित करना है।
‘एक देश, एक संविधान तो आरक्षण में अंतर क्यों?’
सहनी ने अलग-अलग राज्यों में सामाजिक समूहों की आरक्षण स्थिति का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने सवाल किया कि जब देश और संविधान एक है, तो समान सामाजिक समूहों की आरक्षण श्रेणी अलग-अलग राज्यों में अलग क्यों है?
उनका कहना था कि निषाद-कश्यप समाज को सिर्फ राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकार और आरक्षण भी चाहिए। मुकेश सहनी ने निषाद पार्टी के अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि वह आरक्षण की दिशा में ठोस पहल के लिए उन्हें छह महीने का समय दे रहे हैं। सहनी के मुताबिक, यदि इस अवधि में आरक्षण की दिशा में ठोस प्रगति होती है तो वह समर्थन करेंगे। ऐसा नहीं होने पर उन्होंने संजय निषाद से सत्ता छोड़कर समाज के अधिकारों की लड़ाई में उतरने की अपील की।
गंगाजल हाथ में लेकर लिया संकल्प
कार्यक्रम में गंगाजल को प्रतीक के रूप में इस्तेमाल किया गया। सहनी ने कहा कि निषाद समाज के लिए गंगा आस्था से जुड़ी है और इसलिए गंगाजल हाथ में लेकर लिया गया संकल्प आने वाली पीढ़ियों के अधिकार और भविष्य से जुड़ा है। उन्होंने शिक्षा पर भी जोर देते हुए लोगों से अपने बच्चों को हर हाल में पढ़ाने की अपील की।
कार्यक्रम में VIP के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष सहनी, कार्यक्रम प्रभारी प्रदीप कश्यप, डॉ. सोनू कश्यप समेत पार्टी के पदाधिकारी, कार्यकर्ता और निषाद-कश्यप समाज के लोग मौजूद रहे।
अब सवाल यह उठता है कि‘आरक्षण नहीं तो वोट नहीं’ के नारे के साथ उत्तर प्रदेश में उतरी VIP इस अभियान को कितना बड़ा जनसमर्थन दिला पाती है और 2027 के चुनाव से पहले निषाद-कश्यप आरक्षण का मुद्दा प्रदेश की राजनीति पर कितना असर डालता है।

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