10 लाख के इनामी जोनल कमांडर समेत 4 खूंखार नक्सलियों ने डाले हथियार, कोल्हान में पुलिस को मिली बड़ी सफलता
पश्चिमी सिंहभूम में 10 लाख रुपये के इनामी जोनल कमांडर समेत चार नक्सलियों ने पुलिस और सुरक्षा बलों के सामने आत्मसमर्पण किया। कोल्हान में चार वर्षों में 75 नक्सली सरेंडर कर चुके हैं।

Jharkhand Naxal Surrender: झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में चलाए जा रहे नक्सल विरोधी अभियान में सुरक्षा बलों को मंगलवार को एक बहुत बड़ी सफलता हाथ लगी है। चाईबासा स्थित कोल्हान पुलिस मुख्यालय में राज्य सरकार की उग्रवादी आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर 4 हार्डकोर नक्सलियों ने पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के सामने अपने हथियार डाल दिए और मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। आत्मसमर्पण करने वालों में 10 लाख रुपये का इनामी जोनल कमांडर भी शामिल है।
11 लाख के इनामी नक्सलियों ने छोड़ा हिंसा का रास्ता
सरेंडर करने वाले नक्सलियों में 10 लाख रुपये का इनामी जोनल कमांडर सालुका कयाम उर्फ भुवनेश्वर, एक लाख रुपये का इनामी कोदोमुनी कोड़ा, अनिता तामसोय और पिंकी शामिल हैं। आत्मसमर्पण के दौरान इन सभी ने अपने पास मौजूद हथियार, कारतूस और नक्सली सामग्री अधिकारियों को सौंप दी। इस दौरान कोल्हान के DIG अनुरंजन किस्टोपा, CRPF चाईबासा के DIG, पश्चिमी सिंहभूम के SP अमित रेणु और सरायकेला-खरसावां के SP मनोज स्वर्गियारी समेत कई बड़े अधिकारी मौजूद रहे।
4 सालों में 75 नक्सलियों ने किया सरेंडर, ढह रहा है लाल आतंक का किला
पुलिस अधिकारियों ने जानकारी दी कि पिछले 4 वर्षों के दौरान अकेले कोल्हान क्षेत्र में अब तक 75 नक्सली सरेंडर कर चुके हैं। कई खूंखार नक्सलियों को जेल भेजा गया है और कई मुठभेड़ में ढेर हुए हैं। लगभग तीन दशकों तक नक्सलियों का सुरक्षित ठिकाना रहे पश्चिमी सिंहभूम के घने जंगलों में अब सुरक्षा बलों की पकड़ मजबूत हो चुकी है और खुफिया तंत्र के बेहतर होने से नक्सली संगठन का प्रभाव लगातार सिमट रहा है।
असीम मंडल के दस्ते से DIG की अपील, हथियार छोड़ मुख्यधारा में लौटें
कोल्हान के DIG अनुरंजन किस्टोपा ने इस सरेंडर को सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया और शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में अब मुख्य रूप से असीम मंडल का दस्ता ही सक्रिय बचा है, जिसे पकड़ने के लिए लगातार सर्च ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं। DIG ने असीम मंडल और उसके साथियों से भी अपील की है कि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाएं और मुख्यधारा में वापस लौट आएं।
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