बुद्ध पूर्णिमा पर जगमगाया बोधगया; 40 से अधिक देशों के श्रद्धालु जुटे; सीएम आगमन से प्रशासन अलर्ट
महाबोधि महाविहार की पावन धरती पर भगवान बुद्ध की 2570वीं जयंती सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि यह हिंदुस्तान की सांस्कृतिक शक्ति, बिहार की वैश्विक पहचान और शांति संदेश का विराट प्रदर्शन बन गई.

Gaya / Bihar (Report By- Jitendra Kumar): विश्व शांति की राजधानी बोधगया शुक्रवार को बुद्ध पूर्णिमा पर आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर दिखा. महाबोधि महाविहार की पावन धरती पर भगवान बुद्ध की 2570वीं जयंती सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि यह हिंदुस्तान की सांस्कृतिक शक्ति, बिहार की वैश्विक पहचान और शांति संदेश का विराट प्रदर्शन बन गई. सुबह प्रभात फेरी, भव्य झांकियां, मंत्रोच्चार और विभिन्न देशों के बौद्ध मठों से निकले श्रद्धालुओं ने पूरे बोधगया को बुद्धमय कर दिया.
थाईलैंड, जापान, श्रीलंका, म्यांमार समेत कई देशों के भिक्षु और बौद्ध अनुयायी पारंपरिक वेशभूषा में सड़कों पर उतरे. हाथों में ध्वज, बुद्ध वंदना और शांति संदेश के साथ निकली शोभायात्राओं ने बोधगया की फिजा बदल दी. महाबोधि मंदिर परिसर श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहा. बुद्ध के जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण के इस त्रिस्मृति दिवस पर हर कोई खुद को इतिहास के सबसे बड़े आध्यात्मिक केंद्र से जुड़ा महसूस करता दिखा.
बोधगया टेंपल मैनेजमेंट कमेटी (BTMC) ने इस बार आयोजन को सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि जनसेवा से भी जोड़ा. गया जंक्शन से बोधगया तक तीन दिनों की मुफ्त बस सेवा शुरू की गई है. मंदिर परिसर के बाहर नि:शुल्क मेडिकल कैंप, शीतल पेयजल, चना-गुड़ और जूस की व्यवस्था की गई. भीषण गर्मी को देखते हुए बड़े जर्मन हैंगर, पंखे, कूलर और कालचक्र मैदान में ठहरने की विशेष व्यवस्था की गई है. महाराष्ट्र समेत कई राज्यों से श्रद्धालुओं का जत्था पहुंच चुका है.
1 मई को होने वाले संघदान कार्यक्रम और मुख्य समारोह को लेकर प्रशासनिक चौकसी और बढ़ गई है. करीब 10 हजार से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है. वहीं मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी, विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार और भारत में थाईलैंड की काउंसल जनरल सिरिपोर्न थान्यातेप के आगमन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. बोधगया आज सिर्फ बिहार का नहीं, बल्कि पूरी दुनिया का आध्यात्मिक संगम बना हुआ है.
खास बात यह कि जहां दुनिया संघर्ष में उलझी है, वहां बुद्ध की धरती शांति, करुणा और सहअस्तित्व का नया अध्याय लिख रही है. बुद्ध पूर्णिमा के बहाने बोधगया से यह संदेश गूंज रहा है कि बिहार की यह पावन भूमि विश्व को राह दिखाने की ताकत रखती है. वहीं भिक्षु आर्यपाल ने कहा कि बुद्ध जयंती काफी महत्वपूर्ण है. यह दिन विशेष इसलिए भी भगवान बुद्ध का जन्म, ज्ञान और परिनिर्वाण तीनों इसी दिन हुए. यह एक अद्भुत संयोग है. उन्होंने कहा कि थाईलैंड से आए बौद्ध भिक्षुओं में खास उत्साह है. बोधगया भगवान बुद्ध की भक्ति में आज लीन है. हम सभी बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए यह दिन खास है.
specializes in local and regional stories, bringing simple, factual, and timely updates to readers.
Related Posts

DJ में डांस को लेकर दो पक्षों के बीच खूनी संघर्ष, 5 राउंड फायरिंग हुई, एक को लगी गोली

मोतिहारी में ‘4 मिनट का खेल’...थाने से चंद कदम दूर ATM से चोरों ने उड़ाए 36.37 लाख, पुलिस के हाथ अब भी खाली !







