झारखंड राज्यसभा चुनाव में बड़ा उलटफेर? परिमल नाथवानी की एंट्री से कांग्रेस की बढ़ी टेंशन, EC ने दिया नामांकन पर्चे पर बड़ा फैसला
झारखंड राज्यसभा चुनाव में परिमल नाथवानी को भाजपा समर्थन मिलने से मुकाबला रोचक हो गया है. कांग्रेस उम्मीदवार पर संकट बढ़ा, जबकि क्रॉस वोटिंग और विधायकों की एकजुटता चर्चा में है.

Jharkhand Rajyasabha Election: राज्यसभा के नियमों के अनुसार हर दो साल में इसके कुल सदस्यों में से एक तिहाई की रिटायरमेंट हो जाती है. इसके तहत इस बार झारखंड की 6 सीटों में से दो सीट खाली हैं. झारखंड विधानसभा में विधायकों की संख्या के मुताबिक किसी भी उम्मीदवार को चुनाव जीतने के लिए 28 मतों की आवश्यकता होगी. वहीं यह भी बताना आवश्यक है कि राज्यसभा चुनाव में मतदान करने का अधिकार सिर्फ निर्वाचित विधायकों को ही होता है. सत्ताधारी INDIA गठबंधन के पास कुल 56 विधायक हैं. जिनमें 34 JMM, 16 कांग्रेस, 4 राजद और 2 वामपंथी दल के विधायक हैं. वहीं झारखंड में विपक्ष यानी एनडीए के पास 26 (BJP - 24) विधायक हैं. जहां इंडिया गठबंधन अपने विधायकों की सूची के दम पर दोनों की दोनों सीटें जीतने का सामर्थ्य रखती है. वहीं भाजपा अपने विधायकों के बल पर एक भी सीट नहीं जीत सकती. क्योंकि बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने के लिए उन्हें और 4 विधायकों की आवश्यकता होगी.
उद्योगपति परिमल नाथवानी को बीजेपी का समर्थन
वर्तमान आंकड़ों के आधार पर यह स्पष्ट था कि अपने दम पर भाजपा को बहुमत नहीं मिल सकता. इसलिए इन्होंने देश के सबसे अमीर निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी पर दांव चला, जो कि रिलायंस इंडस्ट्रीज के वर्तमान में कॉर्पोरेट मामलों के निदेशक के पद पर हैं. इनकी कुल संपत्ति 754 करोड़ की बताई जाती है.
बढ़ी कांग्रेस उम्मीदवार की संकट
परिमल नाथवानी को समर्थन देने के फैसले के बाद राज्य की राजनीति में गरमाहट तेज हो गई है. माना जा रहा है कि जेएमएम द्वारा जातिवाद से परे हटकर खड़ा किया गया उम्मीदवार एक बड़ा दांव के रूप में साबित हो सकता है. गुरुजी की सीट खाली होने के बाद जेएमएम ने लातेहार से पूर्व विधायक बैजनाथ राम को टिकट दिया है, जिनकी जेएमएम के 34 विधायकों की स्ट्रेंथ को मद्देनजर रखते हुए पक्की समझी जा रही है. लेकिन दूसरी ओर कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा पर संकट के बादल मंडराते दिख रहे हैं. विधायकों की सूची के अनुसार कांग्रेस के पास अपने विधायक केवल 16 ही हैं. इसके अतिरिक्त बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने के लिए उन्हें आरजेडी आदि अन्य सहयोगी दलों पर निर्भर करना होगा. ऐसे में यदि एक भी गठबंधन का विधायक टूटता है तो प्रणव झा का जीतना करीब नामुमकिन सा हो जाएगा. इस आधार पर परिमल नाथवानी का पलड़ा प्रणव झा से भारी नजर आ रहा है.
विवाद के कारण और आरोप-प्रत्यारोप
कांग्रेस के पास अपने विधायकों की सूची बहुमत के आंकड़े यानी 28 की ही है. ऐसे में उनके द्वारा आरोप भाजपा पर लगाया जा रहा है कि पार्टी उनके विधायकों को तोड़ने के लिए होर्स-ट्रेडिंग कर रही है. वहीं भाजपा ने खरीद-फरोख्त के इस आरोप का सिरे से खंडन किया है. ऐसे माहौल में कांग्रेस अपने विधायकों को बाहर भेजने की योजना बना रही है, जिससे विधायकों की बाड़ेबंदी सुनिश्चित की जा सके.
परिमल के नामांकन पर गड़बड़ियां !
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि परिमल नाथवानी द्वारा प्रस्तुत किए गए नामांकन पत्र में कई तकनीकी गड़बड़ियां पाई गई हैं, जिनमें नाम आदि कई जानकारियां गलत हैं. इसके अलावा कांग्रेस का चुनाव आयोग पर भी पक्षपात का आरोप लगाते हुए विधानसभा के बाहर प्रदर्शन भी किया गया. जिसके बाद कुछ समय के लिए तो नामांकन रुका रहा लेकिन अंत में उसे स्वीकार कर लिया गया.
स्थानीय और बाहरी का मुद्दा
परिमल नाथवानी को लेकर जेएमएम और कांग्रेस एकजुटता के साथ कह रही हैं कि उनके उम्मीदवार स्थानीय हैं, जबकि भाजपा बाहरी धन्नासेठ को समर्थन दे रही है. इसके जवाब में बीजेपी ने पलटवार करते हुए कहा है कि जब परिमल झारखंड से सांसद रह चुके हैं तो वे बाहरी कैसे हुए. वहीं उस दौरान उन्हें JMM और कांग्रेस का समर्थन भी प्राप्त था.
अब देखना होगा कि कांग्रेस के विधायकों में कितनी एकजुटता है और वे 28 सीटों का आंकड़ा बचा पाते हैं या परिमल नाथवानी को भीतरी असंतोष का फायदा मिलता है. देखना दिलचस्प होगा कि 18 जून को मतगणना का परिणाम किसके पक्ष में घोषित होता है.
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