Jharkhand (Ranchi): राष्ट्रीय यक्ष्मा दिवस के अवसर पर नामकुम स्थित आईपीएच सभागार में आयोजित भव्य कार्यक्रम में झारखंड सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र को सशक्त बनाने की दिशा में एक और ऐतिहासिक कदम उठाया.
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्य के स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने 76 मेडिकल ऑफिसरों को नियुक्ति पत्र प्रदान करते हुए वर्ष 2029 तक झारखंड को टीबी मुक्त राज्य बनाने का संकल्प दोहराया.
कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह, एनएचएम के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा, डीआईसी डॉ. सिद्धार्थ सान्याल, स्टेट मलेरिया पदाधिकारी डॉ. कमलेश, सहित बड़ी संख्या में डॉक्टर, नव-नियुक्त चिकित्सा पदाधिकारी, सहियाएं और स्वास्थ्य कर्मी उपस्थित रहे.
टीबी उन्मूलन की दिशा में कार्य करने वालों को सम्मान
इस अवसर पर मंत्री डॉ. अंसारी ने न केवल 76 नव-नियुक्त मेडिकल ऑफिसरों को नियुक्ति पत्र सौंपा, बल्कि टीबी उन्मूलन में उत्कृष्ट योगदान देने वाले टीबी चैंपियंस, सहियाओं और एनजीओ को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया. साथ ही, राज्य के सभी जिलों के लिए टीबी जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया, जो गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करेगा.
"राज्य सरकार मजबूत स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्रतिबद्ध"
अपने जोशीले संबोधन में मंत्री डॉ. अंसारी ने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है. उन्होंने बताया कि झारखंड में नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना तेजी से हो रही है और ब्रांबे में मेडिकल यूनिवर्सिटी की स्थापना की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में है. इसके लिए कुलपति की नियुक्ति की जा चुकी है.
सभी मेडिकल कॉलेजों में होगी CT Scan और MRI की सुविधा
उन्होंने आगे कहा कि अप्रैल तक सभी मेडिकल कॉलेजों और सदर अस्पतालों में सीटी स्कैन और एमआरआई की सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे मरीजों को अत्याधुनिक इलाज की सुविधा मिल सकेगी.
टीबी उन्मूलन को लेकर सरकार की गंभीरता पर जोर देते हुए मंत्री ने कहा कि
“हमारा लक्ष्य सिर्फ इलाज नहीं, बल्कि टीबी को जड़ से खत्म करना है. वर्ष 2029 तक झारखंड को टीबी मुक्त बनाना हमारी प्राथमिकता है.”
उन्होंने यह भी घोषणा की कि खून की कमी से जूझ रहे मरीजों के लिए टोल फ्री नंबर के माध्यम से रक्त उपलब्ध कराने की व्यवस्था जल्द शुरू की जाएगी.
मंत्री ने अपने कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि जब से उन्होंने विभाग की जिम्मेदारी संभाली है, तब से राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था में व्यापक और सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहा है.
“आज लोगों का भरोसा सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ा है, और यह हमारे निरंतर प्रयासों का परिणाम है.”
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने बताया कि वर्ष 2025 में टीबी के क्षेत्र में लगभग 9.5 लाख लोगों की जांच की गई थी, जबकि वर्ष 2026 में 12 लाख जांच का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जो राज्य की लगभग 3% आबादी के बराबर है. उन्होंने कहा कि डॉक्टरों की संख्या में वृद्धि और आधुनिक मशीनों की उपलब्धता से इस लक्ष्य को आसानी से प्राप्त किया जा सकेगा.
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और ऑनलाइन रही है, जिसमें किसी भी प्रकार की सिफारिश या हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं थी. डॉक्टरों ने अपनी पसंद के अनुसार स्थान का चयन किया है, इसलिए नियुक्ति के बाद स्थानांतरण नहीं किया जाएगा.
कार्यक्रम की शुरुआत में एनएचएम के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने जानकारी दी कि वर्ष 1882 में टीबी के जीवाणु की खोज हुई थी, इसी कारण 24 मार्च को राष्ट्रीय यक्ष्मा दिवस मनाया जाता है. उन्होंने बताया कि राज्य में 100 दिवसीय टीबी जागरूकता अभियान चलाया जाएगा, जिसमें जांच, पहचान, उपचार और पोषण राशि के भुगतान पर विशेष जोर दिया जाएगा.
अंत में, कार्यक्रम में उपस्थित सभी अधिकारियों और स्वास्थ्य कर्मियों ने झारखंड को टीबी मुक्त बनाने और स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने का सामूहिक संकल्प लिया.









