JSSC विवाद में हेमंत सरकार को हाईकोर्ट से बड़ा झटका!, परीक्षा और बहाली रद्द करने वाले आदेश पर लगी अंतरिम रोक
JSSC परीक्षा और नियुक्तियों को रद्द करने के झारखंड सरकार के आदेश पर हाईकोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी। जस्टिस दीपक रोशन की पीठ ने सरकार से जवाब मांगा और अभ्यर्थियों को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।

Jharkhand High Court; झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं और JSSC CGL परीक्षा के जरिए हुई नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने इस मामले में दखल देते हुए सरकार के उस आदेश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है, जिससे सैकड़ों नवनियुक्त अभ्यर्थियों के सिर पर तलवार लटक गई थी। कोर्ट के इस बड़े फैसले से उन तमाम अभ्यर्थियों ने बड़ी राहत की सांस ली है, जिनकी नौकरी पर संकट मंडराने लगा था।
तीन अलग-अलग याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई
यह पूरा मामला हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस दीपक रोशन की एकल पीठ के सामने सुनवाई के लिए आया था। शालिनी सुंडी और अन्य, रोजलिन श्वेता तिग्गा और अन्य, तथा ऋषिकेश सज्जन व अन्य द्वारा दायर तीन अलग-अलग रिट याचिकाओं को एक साथ जोड़कर अदालत में पेश किया गया था। इन सभी याचिकाओं में राज्य सरकार द्वारा पूरी परीक्षा प्रक्रिया और बहालियों को अचानक रद्द कर दिए जाने के आदेश को असंवैधानिक और मनमाना बताते हुए चुनौती दी गई थी।
प्रार्थियों को मिली अंतरिम राहत, सरकार से मांगा जवाब
मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने सरकार द्वारा जारी किए गए कैंसिलेशन आदेश पर सीधे तौर पर रोक लगा दी। इसके साथ ही पीठ ने राज्य सरकार को कड़ा निर्देश दिया है कि वह इस पूरे मामले पर अपना विस्तृत जवाब दाखिल करे और यह स्पष्ट करे कि किन ठोस आधारों पर नियुक्तियां रद्द करने का कदम उठाया गया था। सरकार का जवाब आने के बाद ही इस मामले की आगे की रूपरेखा तय होगी।
अभ्यर्थियों को देना होगा व्यक्तिगत शपथ पत्र
राहत देने के साथ ही हाईकोर्ट ने सभी याचिकाकर्ताओं के सामने एक अहम कानूनी शर्त भी रखी है। अदालत ने निर्देश दिया है कि सभी प्रार्थी व्यक्तिगत रूप से एक हलफनामा दाखिल करेंगे, जिसमें यह स्पष्ट रूप से दर्ज होगा कि इस मामले में ट्रायल कोर्ट द्वारा जो भी अंतिम फैसला सुनाया जाएगा, वह उन सभी के लिए पूरी तरह बाध्यकारी होगा। अदालत ने यह भी साफ कर दिया कि अंतिम फैसले के आधार पर राज्य सरकार कानून के मुताबिक आगे की उचित कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र रहेगी।
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